नितीन दर्यापुरकर और शिरीष भांगे
Biomining Project Karanja: नगरपंचायत कार्यालय में मंगलवार, 17 मार्च को नगराध्यक्ष स्वाती भिलकर ने पत्रकार परिषद कर कहा कि नगरपंचायत की स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान 2.0 के तहत कारंजा घाडगे में कचरा डेपो का विलीनीकरण और बायोमायनिंग का कार्य शुरू किया गया था। नगर पंचायत ने इस परियोजना के लिए सुरक्षा राशि के रूप में 1,95,265 रुपये डीडी के माध्यम से जमा किए थे, जबकि शासन ने इस कार्य के लिए 1 करोड़ 28 लाख 70 हजार रुपये मंजूर किए थे।
कचरे के माप के बाद, लगभग 1,700 टन कचरे पर कार्य किया गया और इसके लिए 97,64,700 रुपये की निविदा निकाली गई। हालांकि, इस परियोजना को लेकर विरोधी दल भाजपा के गटनेता शिरीष भांगे ने श्रृंखला अनशन शुरू किया। उनका आरोप है कि सत्ताधारी शिवसेना शिंदे गट के पदाधिकारी इस प्रक्रिया में गड़बड़ी कर रहे हैं। नगराध्यक्ष स्वाती भिलकर ने कहा कि यह अनशन केवल विरोधी गट द्वारा नगरपंचायत और विकास कार्यों को बदनाम करने का षड़यंत्र है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले छह महीनों में नगर पंचायत चुनाव हैं और विरोधी पक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। पत्रकार परिषद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कचरा डेपो व बायोमायनिंग की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और शासन द्वारा दी गई दिशा-निर्देशों के अनुसार की जा रही है, और नगर पंचायत की टीम इस कार्य में पूरी गंभीरता से लगी हुई है।
पत्रकार परिषद में नगरसेवक और शिवसेना गटनेता नितिन दर्यापूरकर ने कहा कि कारंजा में चल रहा अनशन भाजपा के नगरसेवक नहीं बल्कि कांग्रेस विचारधारा के नगरसेवक कर रहे हैं, जो चुनाव की दृष्टिकोण से नगर पंचायत और विकास कार्यों को बदनाम करने का षड़यंत्र हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और विधायक सुमित वानखेड़े के नेतृत्व में कारंजा में कई विकासात्मक कार्य शुरू किए गए हैं।
प्वाइंटर
परियोजना के लिए नपं ने 1,95,265 रु. जमा
सरकार ने 1 करोड़ 28 लाख 70 हजार रु. किए मंजूर
1,700 टन कचरे के कार्य के लिए 97,64,700 रु. की निविदा
इनमें पानी की आपूर्ति सुधार, कचरा डेपो में कचरे का विलीनीकरण और बायोमायनिंग शामिल हैं। इसके अलावा, बिहाडी रोड पर नया कचरा डेपो बनाने का कार्य भी वर्तमान में जारी है। ये सभी कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ और निधि स्वीकृति के अनुसार चल रहे हैं, फिर भी विपक्षी गट द्वारा बिना किसी ठोस कारण शहर और नगरपंचायत की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
नगर पंचायत के स्वीकृत सदस्य और भाजपा गटनेता शिरीष भांगे ने कहा कि कारंजा के कचरा डेपो में जमा कचरे का सही आंकलन और नियोजित स्थल पर स्थानांतरण केवल टिप्पर की गिनती से ही पता चल सकता है। सत्ताधारी और संबंधित अधिकारी किसी भी परिस्थितियों में कचरे को नियोजित स्थल पर स्थानांतरित करने के लिए तैयार नहीं हैं।
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कुल कचरा लगभग 6-7 हजार मेट्रिक टन है, जबकि इस पर अनुमानित लागत लगभग 25 लाख रुपये बताई गई थी। वास्तविकता में यह 17,700 मेट्रिक टन कचरा है और इसका अनुमानित खर्च लगभग 96 लाख रुपये है। भांगे ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार उजागर होने के डर से सत्ताधारी और अधिकारी कचरा उठाने में विलंब कर रहे हैं।
इस प्रक्रिया में लगभग 30 लाख रुपये का खर्च आने वाला है। सत्ताधारी झूठ बोलकर यह बता रहे हैं कि उन्हें टेंडर प्रक्रिया की पूरी जानकारी है, जिससे जनता को गुमराह किया जा रहा है। इस मामले से जुड़ा वीडियो सभागृह में सार्वजनिक किया जाए, नोटिस सूची में इस विषय को दर्ज किया जाए।