“अब चाहे मेरी अर्थी उठे, लेकिन आंदोलन नहीं रुकेगा”, बच्चू कडू का किसानों की समस्याओं के लिए बेमियादी अन्नत्याग आंदोलन
महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले में रविवार को किसानों और खेत मज़दूरों की समस्याओं को लेकर एक नया जनांदोलन शुरू हुआ, जिसकी अगुवाई प्रहार जनशक्ती पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक बच्चू कडू कर रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
बच्चू कडू का किसानों की समस्याओं के लिए बेमियादी अन्नत्याग आंदोलन शुरू। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
अमरावती: महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले में रविवार को किसानों और खेत मज़दूरों की समस्याओं को लेकर एक नया जनांदोलन शुरू हुआ, जिसकी अगुवाई प्रहार जनशक्ती पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक बच्चू कडू कर रहे हैं। उन्होंने हजारों समर्थकों की उपस्थिति में गुरुकुंज, मोझरी में बेमियादी अन्नत्याग आंदोलन की शुरुआत करते हुए राज्य सरकार के प्रति गहरा रोष प्रकट किया।
बच्चू कडू ने मंच से भावुक होते हुए कहा, “अब चाहे मेरी शवयात्रा ही क्यों न निकले, पर जब तक किसानों और खेत मजदूरों के साथ न्याय नहीं होता, तब तक यह आंदोलन बंद नहीं होगा। हम किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।” यह आंदोलन केवल एक भूख हड़ताल नहीं, बल्कि राज्य के उन किसानों और खेत मजदूरों के लिए आवाज़ है जो लंबे समय से सरकारी वादाखिलाफी का शिकार हो रहे हैं। बच्चू कडू ने स्पष्ट आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा चुनावों से पहले जिन वादों को लेकर वोट मांगे थे, उनमें से अधिकांश आज तक अधूरे हैं।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- किसानों के लिए संपूर्ण कर्जमाफी और सात-बारा दस्तावेज़ को पूर्णतः कर्जमुक्त किया जाए।
- खेत मजदूरों के लिए एक स्वतंत्र आर्थिक महामंडल की स्थापना।
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरी में उचित वृद्धि।
- खेत मजदूरों के आकस्मिक मृत्यु पर उन्हें बीमा कवच की सुविधा।
- खेती के हर चरण — बुआई से कटाई तक — को रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत शामिल किया जाए।
- यदि यह संभव न हो, तो तेलंगाना मॉडल के अनुसार प्रति एकड़ ₹10,000 की सीधी वित्तीय सहायता किसानों को दी जाए।
- जैविक और मेंढी खाद पर भी रासायनिक खाद की तरह अनुदान की व्यवस्था।
- दूध में मिलावट पर कठोर कार्रवाई, और गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹50 तथा भैंस के दूध का ₹60 प्रति लीटर तय किया जाए।
- प्याज उत्पादकों को न्याय दिलाने हेतु, जब तक बाज़ार में ₹40 प्रति किलो का भाव न मिल जाए, तब तक निर्यात पर कोई रोक न लगाई जाए।
- दिव्यांगजनों को मानधन समय पर और नियमित रूप से दिया जाए।
आंदोलन की तैयारी में दिखी एकजुटता
इस आंदोलन की शुरुआत संत गाडगे बाबा मंदिर, अमरावती से एक भव्य बाइक रैली के ज़रिए हुई, जो मोझरी के राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज समाधि स्थल पर समाप्त हुई। इसमें सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं, किसानों और समर्थकों ने भाग लिया। इस रैली के माध्यम से बच्चू कडू ने सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि ग्रामीण जनता अब चुप नहीं बैठेगी।
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सरकार की वादाखिलाफी पर तीखा प्रहार
बच्चू कडू ने कहा कि “चुनावों से पहले बड़े-बड़े वादे किए गए। कहा गया कि किसानों की सारी कर्जें माफ होंगी। सात-बारा कागजात पूरी तरह साफ कर दिए जाएंगे। लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने सब कुछ भुला दिया।” उन्होंने सरकार पर जानबूझकर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया और कहा कि “मंत्रियों और अधिकारियों के वेतन समय पर दिए जाते हैं, लेकिन दिव्यांगों को उनका हक़ महीनों तक नहीं मिलता।”
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‘यह आंदोलन नहीं, आत्मबलिदान की शुरुआत है’
अपने वक्तव्य में बच्चू कडू कई बार भावुक हुए और उन्होंने कहा, “यह कोई प्रदर्शन नहीं, यह आत्मबलिदान की शुरुआत है। यह लड़ाई है उन लोगों के लिए जो ज़िंदगी भर खेतों में मेहनत करते हैं, लेकिन अंत में उनका शोषण ही होता है। अब हम मर भी जाएं, तो चलेगा, लेकिन बिना इंसाफ के पीछे नहीं हटेंगे।”
राजनीतिक गलियारों में हलचल
बच्चू कडू के इस आक्रामक आंदोलन से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस आंदोलन को किसानों की आवाज़ बताया है, जबकि सत्तापक्ष अब तक इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दे पाया है। सवाल यह है कि क्या सरकार बच्चू कडू की मांग को पूरा करेगी।
