अमरावती में पार्टियो की प्रचार रैली (सोर्स: सोशल मीडिया)
Amravati Municipal Election Political Rallies : आगामी 15 जनवरी को होने वाले बहुप्रतीक्षित अमरावती मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में रविवार को शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया। छुट्टी का फायदा उठाते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने शहर की गलियों और मोहल्लों में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे झंडे, बैनर और गगनभेदी नारों के साथ निकाली गई रैलियों ने पूरे शहर को चुनावी रंग में रंग दिया। कई स्थानों पर अलग-अलग दलों की रैलियां आमने-सामने आने से राजनीतिक सरगर्मी और अधिक बढ़ गई।
विभिन्न प्रभागों में उम्मीदवारों ने पैदल रैलियों के माध्यम से मतदाताओं से सीधा संवाद साधा। बड़ी संख्या में समर्थक इन रैलियों में शामिल हुए। उम्मीदवारों ने नागरिकों को अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी दी और भविष्य की योजनाओं का भरोसा दिलाया। इन रैलियों में युवाओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों की सक्रिय भागीदारी खास आकर्षण का केंद्र रही।
लगातार निकलती रैलियों के कारण कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ, लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। शहर की कई गलियों में विरोधी दलों की रैलियां आमने-सामने आईं, जिससे राजनीतिक रोमांच और बढ़ गया। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना। हालांकि आपसी समन्वय और संयम के चलते सभी रैलियां शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुईं। कुल मिलाकर रविवार का दिन शहर में चुनावी जोश, राजनीतिक उत्साह और शक्ति प्रदर्शन का गवाह बना, जिससे यह साफ हो गया है कि अमरावती मनपा चुनाव अब अपने अंतिम और निर्णायक दौर में पहुंच चुका है।
अमरावती शहर के साईंनगर (प्रभाग 13), जमील कॉलोनी-लालखडी (प्रभाग 4), महेंद्र कॉलोनी (प्रभाग 5), मोरबाग (प्रभाग 6), जवाहर गेट (प्रभाग 7), वडाली–एसआरपीएफ (प्रभाग 9), रुख्मिणी नगर–फ्रेजरपुरा (प्रभाग 11), रहेमत नगर-अलीम नगर (प्रभाग 16), सुतगिरणी रोड (प्रभाग 20), फरशी स्टॉप और दस्तूर नगर क्षेत्रों में प्रचार की विशेष धूम रही। यहां पार्टियों द्वारा दिन में रैली के साथ रात में सभाओं का आयोजन किया गया।
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इन इलाकों में भाजपा, एमआईएम, शिवसेना (शिंदे गुट), युवा स्वाभिमान, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी रैलियां निकालकर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। लाउडस्पीकर लगे ऑटो-रिक्शाओं के कारण कई जगहों पर शोरगुल का माहौल रहा। रैलियों में नेताओं और पदाधिकारियों की भी सक्रिय मौजूदगी रही।