अमरावती मनपा की सभा में स्वच्छता पर संग्राम: कचरा ठेका रद्द करने और कर्मचारियों की संख्या पर तीखे सवाल
Amravati Local Body News: अमरावती मनपा की विशेष सभा में सफाई व्यवस्था पर भारी हंगामा। पार्षदों ने कचरा ठेका रद्द करने, कर्मचारियों की कमी और अंबा नदी की बदहाली पर प्रशासन को जमकर फटकार लगाई।
- Written By: रूपम सिंह
अमरावती महापालिका (फोटो- सोशल मीडिया)
Amravati Municipal Corporation: अमरावती शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर शनिवार को आयोजित अमरावती महानगरपालिका की तीसरी विशेष सर्वसाधारण सभा में भारी हंगामा देखने को मिला। विभिन्न प्रभागों के पार्षदों ने ठेका प्रक्रिया, कर्मचारियों की कमी, डंपिंग व्यवस्था और अंबा नदी की बदहाल स्थिति जैसे मुद्दों पर प्रशासन को आड़े हाथों लिया। अधिकांश सवालों पर प्रशासन संतोषजनक जवाब देने में असफल रहा, जिससे सदन में नाराजगी का माहौल बन गया।
“क्या लोगों के मरने के बाद ही सफाई होगी?”
गौरक्षण प्रभाग क्रमांक 13 की पार्षद लाविना हर्षे ने सफाई व्यवस्था पर कड़ा रोष जताया। उन्होंने कहा कि पहले उनके प्रभाग में 45 सफाई कर्मचारी थे, लेकिन अब वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं है। रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग करते हुए उन्होंने जोन-2 के कंपोस्ट डिपो में जमा कचरे को तत्काल हटाने की आवश्यकता बताई। “हार्ट ऑफ सिटी” क्षेत्र से कचरा स्थल स्थानांतरित करने की मांग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने तीखा सवाल किया
ठेका तत्काल रद्द करने की मांग
उपमहापौर सचिन भेंडे ने सफाई ठेके को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कोणार्क कंपनी को उस समय ठेका दिया गया, जब उसके पास न तो पर्याप्त साधन थे और न ही आवश्यक मानवबल। प्रभाग 11 में ट्रायल बेस पर दिया गया ठेका पूरी तरह विफल साबित हुआ है, इसलिए इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने स्मशान भूमि पर कचरा फेंकने की प्रथा को तुरंत बंद करने की मांग भी की।
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“आंदोलन करने पर मजबूर न करें”
सुतगिरणी प्रभाग क्रमांक 20 की पार्षद सुमती ढोके ने सभी प्रभागों में उपलब्ध सफाई कर्मचारियों की जानकारी मांगी। इस पर प्रशासन की ओर से जवाब दे रहे अधिकारियों के उत्तर से असंतुष्ट होकर उन्होंने कहा कि पुराने ठेकों का हवाला देकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गोलमोल जवाबों का सिलसिला जारी रहा, तो जनता को सड़क पर उतरना पड़ेगा।
“जब विधायक की भी नहीं सुनी जा रही…”
प्रभाग 10 फ्रेजरपुरा-वडाली के पार्षद मंगेश मनोहरे ने कहा कि अवैध डंपिंग पर एक लाख रुपये का दंड निर्धारित है और स्मशान भूमि में कचरा फेंकना प्रतिबंधित है, फिर भी खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है।उन्होंने समर्पित एजेंसी नियुक्त करने और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। नाराजगी जताते हुए कहा “जब अधिकारी विधायक की भी नहीं सुन रहे, तो पार्षदों की क्या स्थिति होगी? हमें जनता को जवाब देना पड़ता है।”
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कर्मचारियों की कमी और सुरक्षा का मुद्दा
प्रभाग 16 रहेमत नगर-अलीम नगर की पार्षद मारियम बानो ने बताया कि 35 हजार से अधिक आबादी वाले क्षेत्र में नियमित कचरा उठाव नहीं हो रहा है। कर्मचारियों की भारी कमी है। उन्होंने सफाई कर्मियों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराने की भी मांग की।
अंबा नदी की दुर्दशा पर चिंता
प्रभाग 11 फ्रेजरपुरा-रुक्मिणी नगर के पार्षद इस्माईल लालूवाले ने अंबा नदी की सफाई कर उसे उसके मूल स्वरूप में लाने की मांग की। उन्होंने अधिकारियों पर संतोषजनक जवाब न देने का आरोप लगाया। इस मुद्दे पर कई महिला पार्षदों ने भी सहमति जताई। कांग्रेस के बबलू शेखावत सहित अन्य सदस्यों ने शहर की गंदगी को लेकर प्रशासन को घेरा और कहा कि जनता को केवल आश्वासन नहीं, ठोस काम चाहिए।
गुट नेताओं ने भी साधा निशाना
सभा के दौरान भाजपा गुट नेता चेतन गावंडे, युवा स्वाभिमान पार्टी के नाना आमले, एमआईएम के अब्दुल हमीद, उबाठा के डॉ. राजेंद्र तायडे सहित विभिन्न दलों के गुट नेताओं ने भी प्रशासन से तीखे सवाल किए। देर शाम तक चली इस विशेष सर्वसाधारण सभा में लगभग पूरा समय सफाई व्यवस्था पर ही चर्चा होती रही, लेकिन अधिकांश सवालों पर प्रशासन असहज और जवाब देने में नाकाम नजर आया। पार्षदों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन किया जाएगा। अब अमरावती शहरवासियों की निगाहें मनपा प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
