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स्वघोषित उम्मीदवार नेताओं के लिए बने सिरदर्द, उम्मीदवारी की घोषणा में बढ़ रहा है खर्च

Local Body Elections: स्थानीय निकाय चुनाव से पहले स्वघोषित उम्मीदवारों की पोस्टर पॉलिटिक्स से नेताओं की सिरदर्दी बढ़ी। बगावत और गुटबाजी के संकेत तेज़ हो गए है।

  • Written By: आंचल लोखंडे
Updated On: Nov 08, 2025 | 08:20 PM

स्वघोषित उम्मीदवार नेताओं के लिए बने सिरदर्द (सौजन्यः सोशल मीडिया)

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Akola Political News: मलकापुर स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आधिकारिक उम्मीदवारी की घोषणा से पहले ही संभावित उम्मीदवारों ने बैनर, ग्रीटिंग बोर्ड और सोशल मीडिया कैंपेन के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है। इस ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ ने पार्टी के भीतर तनाव और संभावित बगावत की आशंका को बढ़ा दिया है। नेताओं के सामने उम्मीदवार चयन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

स्थानीय निकाय चुनावों के ऐलान के साथ ही ‘राजनीतिक बैनरों’ की ताकत बढ़ गई है। कई उम्मीदवार ‘स्वघोषित प्रत्याशी’ बनकर बैनर, ग्रीटिंग बोर्ड और सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अपनी उम्मीदवारी का प्रचार कर रहे हैं। इससे नेताओं की सिरदर्दी बढ़ गई है और भविष्य में बगावत की आशंका भी जताई जा रही है।

चुनाव में चढ़ेगा सियासी पारा

हालांकि पार्टियों ने अभी तक अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, फिर भी कई लोगों ने ‘जनता का उम्मीदवार, हमारा सेवक’ जैसे नारों के साथ अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी है। चुनावी माहौल में दिवाली त्योहार का लाभ उठाते हुए कई उम्मीदवारों ने शुभकामना बैनरों के ज़रिए अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। ग्राम पंचायत से लेकर जिला परिषद तक हर स्तर पर यह रुझान दिखाई दे रहा है।

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बढ़ते विद्रोह के संकेत

पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा के समय नेताओं के लिए बड़ी चुनौती सामने आएगी, क्योंकि इन स्वयंभू उम्मीदवारों से नाम वापस लेना आसान नहीं होगा। संकेत मिल रहे हैं कि कई संभावित उम्मीदवार बगावत का रास्ता अपना सकते हैं। उनका कहना है, “हमने तैयारी कर ली है, जनता हमें पहचान चुकी है।”

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‘पोस्टर पॉलिटिक्स’

‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ ने हर स्तर पर अपनी पकड़ बना ली है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में सियासी पारा चढ़ गया है और पार्टी के भीतर गुटबाजी भड़कने की आशंका बढ़ गई है। इस बीच, जिला परिषद और पंचायत समिति के आरक्षण की घोषणा के बाद प्रत्याशी अपने सुविधाजनक क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। कुछ गांवों में बैनर लगाने को लेकर विवाद की स्थिति भी बन रही है। वहीं, चुनाव आचार संहिता लागू होते ही राजनीतिक दलों में भय और सतर्कता का माहौल देखा जा रहा है।

 

Self proclaimed candidates have become headache for politicianswith rising costs associated with announcing candidacies

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Published On: Nov 08, 2025 | 08:20 PM

Topics:  

  • Akola News
  • Maharashtra
  • Maharashtra Local Body Elections

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