Akola: सिर्फ 24 घंटे में खत्म हुई बिजली कर्मचारियों की 72 घंटे की हड़ताल, जानिए क्या बनी वजह!
Akola के साथ ही पूरे महाराष्ट्र में Mahavitran बिजली कर्मचारियों ने अपनी 72 घंटे की हड़ताल को 24 घंटे में ही खत्म कर दिया। अदालत की सुनवाई शुरू होते ही कर्मचारियों ने हड़ताल तोड़ी दी थी।
- Written By: अपूर्वा नायक
महावितरण कर्मचारी हड़ताल (सौ. सोशल मीडिया )
Akola News In Hindi: शहर के साथ साथ राज्य भर में महाराष्ट्र राज्य बिजली कर्मचारी, अभियंता, अधिकारी कृति समिति द्वारा 72 घंटों की हड़ताल शुरू की गयी थी। यह हड़ताल शुक्रवार को 24 घंटों में ही स्थगित हो गया है।
जानकारी के अनुसार कृति समिति में शामिल संगठनों के साथ 14 व 15 अक्टूबर को बातचीत की तारिख तय होने से कामगार आयुक्त के सामने कान्सिलिअेशन प्रोसिंडिंग में उनके द्वारा हड़ताल रोकने के लिए किए गए आदेश के अनुसार कृति समिति में शामिल सातों संगठनों द्वारा पुकारी गई हड़ताल स्थगित की गयी है।
इस हड़ताल में महाराष्ट्र राज्य स्टेट इलेक्ट्रीसिटी वर्कर्स फेडरेशन, महाराष्ट्र बिजली कामगार महासंघ, सबार्डिनेट इंजि एसो, महाराष्ट्र राज्य बिजली कामगार कांग्रेस इंटक, महाराष्ट्र राज्य पिछड़ावर्गीय बिजली कर्मचारी संगठन, महाराष्ट्र राज्य स्वाभिमानी बिजली वर्कर्स यूनियन, तकनीकी कामगार यूनियन इतने बिजली संगठन शामिल थे।
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बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिजली अधिकारियों और कर्मियों की डेढ़ दिन की हड़ताल में महावितरण, महापारेषण व महानिर्मिति में 62.56 प्रश अभियंता, अधिकारी व कर्मचारी कार्यालयों में उपस्थित थे। वहीं 37.44 प्रश कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए थे। प्रमुखता से महावितरण की पुर्नरचना व अन्य मांगों के संबंध में महावितरण की 29 में से 7 संगठनों की संयुक्त कृति समिति ने 72 घंटों की हड़ताल की नोटिस दी थी।
यह हड़ताल टालने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (ऊर्जा) आभा शुक्ला, महावितरण के अध्यक्ष व प्रबंधकीय संचालक लोकेशचंद्र, संचालक सचिन तालेवार, (संचालन प्रकल्प), राजेंद्र पवार (मानव संसाधन) ने स्वतंत्र बैठक लेकर सकारात्मक व मांगों से सुसंगत भूमिका घोषित की। उस अनुसार कृति समिति को बैठक की लिखित जानकारी तथा हड़ताल न करने हेतु आवाहन करने वाले पत्र दिए गए। कर्मचारी संगठनों की मांगों के अनुसार व ग्राहक सेवा गतिमान करने के लिए पुर्नरचना के अनुसार उप विभागों का कामकाज प्रायोगिक तत्वों पर शुरू किया गया।
इस प्रायोगिक कालावधी में आवश्यकता नुसार बदलाव या दुरूस्ती कर के संगठन व प्रबंधन की सहमति के बाद पुर्नरचना पर अमल करने के विषय में अंतिम आदेश निकाला जाएगा, यह भी स्पष्ट किया गया। मात्र संयुक्त कृति समिति ने प्रतिसाद नहीं दिया।
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कानून में है प्रावधान
इस बीच हड़ताल की नोटिस मिलते ही औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत मुंबई के कामगार आयुक्त कार्यालय में निपटाने के लिए महावितरण द्वारा प्रकरण दाखिल किया गया था, इस पर कार्रवाई जारी होते हुए हड़ताल नहीं की जा सकती ऐसा कानून में प्रावधान है। बिजली यह आवश्यक सेवा है, राज्य में अत्यावश्यक सेवा परिरक्षक अधिनियम (मेस्मा) लागू होने से हड़ताल न करें, यह आवाहन महावितरण प्रबंधन की ओर से किया गया था। संयुक्त कृति समिति ने 9 अक्टूबर से हड़ताल की शुरूआत की थी इस गैर कानूनी हड़ताल के विरुद्ध औद्योगिक न्यायालय में महावितरण ने याचिका दाखिल की थी। यह याचिका दाखिल कर के न्यायालय ने कृति समिति को नोटिस दी थी। दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह न्यायालय में याचिका पर सुनवाई शुरू होने के बाद संयुक्त कृति समिति ने यह हड़ताल वापस लेने की घोषणा की है।
