अकोला में खाद और बीज खरीदने उमड़े किसान, कालाबाजारी की आशंका से बढ़ी चिंता
Kharif Season Fertilizer Distribution: अकोला में खरीफ सीजन से पहले खाद-बीज के लिए केंद्रों पर भीड़। कालाबाजारी रोकने के लिए कलेक्टर वर्षा मीणा ने 7/12 उतारा और पहचान पत्र अनिवार्य कर नियम सख्त किए।
- Written By: केतकी मोडक
खाद प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Akola Farmers Fertilizer Purchase Queue: मानसून की समुचित बारिश होने के बाद ही अकोला जिले में खरीफ फसलों की बुआई शुरू होती है। अभी मानसून पहुंचा ही नहीं है। जिले में किसान मानसून की बारिश आने से पहले ही अपने खेतों की सफाई तथा बुआई पूर्व किए जाने वाले कार्य पूरे कर लेते हैं। जिससे मानसून की समूचित बारिश होते ही किसान अपने खेतों में तेजी से खरीफ फसलों की बुआई कर सकें।
खेतों की सफाई छोड़ कतारों में खड़े रहने को मजबूर अन्नदाता
इस बार की स्थिति जिले भर में थोड़ी अलग है। किसान खेतों की सफाई तथा अन्य कार्य करने की बजाए कृषि सेवा केंद्रों के सामने जो खाद उन्हें चाहिए उसे खरीदने के लिए कतारों में लगे हैं। अकोला जिले की कुछ तहसीलों में कृषि सामग्री बिक्री प्रतिष्ठानों के सामने कहीं भीड़ बहुत अधिक है तो कहीं कहीं भीड़ कुछ कम है लेकिन किसान आसानी से खाद, बीज आदि खरीद नहीं पा रहे हैं।
आर्थिक संकट के बीच मनचाही कृषि सामग्री का संकट
किसानों का ध्यान इस ओर लगा है कि मानसून की बारिश शुरू होने से पहले ही उन्हें जितने प्रमाण में जो बीज चाहिए, जो खाद चाहिए वह उपलब्ध हो जाए, बारिश से पूर्व खेतों की सफाई हो जाए लेकिन फिलहाल किसानों के लिए यह सभी बातें आसान नहीं हैं। आर्थिक संकट में फंसा हुआ जिले का किसान खरीफ फसलों की बुआई के लिए पहले तो पैसों का इंतजाम करता है चाहे बैंकों से फसल कर्ज मिले या निजी स्तर पर कर्ज मिले उसे हर हाल में खरीफ फसलों की बुआई तो करनी ही हैं।
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इस विषम परिस्थिति में भी किसानों को आसानी से उनके मनचाहे बीज और खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। कुछ किसानों ने अपने खेतों को पूरी तरह से ठीक कर लिया है तो कुछ किसान अभी भी अपने खेतों को ठीक करने में लगे हैं।
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सरकार की सख्ती के बावजूद लग रही कतारें
- हाल ही में 1976 मीट्रिक टन यूरिया जिले के किसानों के लिए पहुंच गया है। उस पर इस खरीफ सीजन में जिले भर में यूरिया और डीएपी खाद खरीदने के लिए कृषि सेवा केंद्रों पर हो रही भीड़ तथा कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने जिले के सभी खाद विक्रेताओं को यूरिया और डीएपी की विक्री करने के लिए पूरी तरह से नियोजन करने के आदेश दिए हैं।
- इस आदेश में कहा गया है कि, यूरिया और डीएपी खाद खरीदने के लिए आनेवाले प्रत्येक व्यक्ति की किसान के रूप में पहचान कर लें। इसके लिए सात बारह का उतारा और आधार कार्ड की कॉपी आवश्यक कर दी गयी है। इसी तरह प्रत्येक किसान को अधिक से अधिक खाद के 5 बैग का वितरण ही किया जा रहा है।
- इस तरह के आदेश भी प्रशासन द्वारा दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि यदि किसी के पास किसान होने के समुचित प्रमाण नहीं है तो उसे बिक्री न की जाए। आश्चर्य तो इस बात का है कि, कृषि विभाग लगातार प्रयत्न कर रहा है कि, किसानों को समूचित खाद और बीज उपलब्ध करवाई जाए। इसके बावजूद भी कृषि सामग्री केंद्रों के सामने इतनी कतारें लग रही है।
