भंडारा में कागजों तक सीमित डम्पिंग यार्ड, सुप्रीम कोर्ट के नियमों की खुलेआम अनदेखी
Bhandara Dumping Yard: तुमसर डम्पिंग यार्ड की आग से भंडारा जिले में कचरा प्रबंधन की पोल खुली। सुप्रीम कोर्ट के नियमों को ताक पर रख रिहायशी इलाकों व स्कूलों के पास कचरा फेंका जा रहा है।
- Written By: केतकी मोडक
सुप्रीम कोर्ट फाईल फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया)
Bhandara Waste Management Failure: भंडारा के तुमसर नगर परिषद के डोंगरला रोड स्थित डम्पिंग यार्ड में दोपहर में लगी भीषण आग ने जिले के सभी स्थानीय निकायों में कचरा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। इस हादसे में कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक वर्गीकरण की करीब 20 से 25 लाख रुपये की अत्याधुनिक मशीनरी जलकर खाक हो गई। इस घटना के बाद अब जिले के अन्य स्थानों पर स्थित डम्पिंग याडों की सुरक्षा और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
हकीकत यह है कि भंडारा जिले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बनाए गए यह डम्पिंग यार्ड नियमों का पालन करने के बजाय केवल कागजों की शान बढ़ा रहे हैं। जिले में भंडारा, तुमसर, साकोली और पवनी में नगर परिषद हैं, जबकि लाखनी, लाखांदुर और मोहाडी में नगर पंचायत कार्यरत हैं।
इन सभी जगहों पर डम्पिंग यार्ड तो बने हैं, लेकिन एक की भी स्थिति ठीक नहीं है। डम्पिंग यार्ड आबादी, नदी/जलस्त्रोत और तालाबों से कम से कम 200 मीटर दूर होने चाहिए। लेकि इस नियम की भी धज्जियां उड रही है। यार्ड के चारों ओर पेड लगाने का नियम किसी को पता ही नहीं है।
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40 टन कचरे का संकट
भंडारा जिला मुख्यालय भंडारा में हर दिन निकलने वाले करीब 40 टन कचरे के निपटारे की व्यवस्था पूरी तरह ठप है। वरठी रोड पर जमनी परिसर स्थित केंद्र में कचरे पर कोई प्रक्रिया नहीं हो रही है। यहां कचरे के विशाल ढेर लग गए हैं, जिनमें कुछ महीने पहले आग लगाई गई थी। खुले में कचरा जलने से निकलने वाले विषैले धुएं के कारण टाकली सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के नागरिकों का स्वास्थ्य खतरे में है।
घंटागाड़ियों से गीला और सूखा कचरा एक साथ मिला देने से जैविक खाद की गुणवत्ता खराब हो चुकी है, जिससे यह प्रोजेक्ट अब सिरदर्दी बन गया है। इसके अलावा, पिछले दिनों शहर के आवारा कुत्तों को पकड़कर इसी स्थान पर रखा गया था। उनको कैद में रखने की वजह से नगर परिषद के प्रबंधन की पोल खुल गई थी।
लाखनी, लाखांदूर और पवनी में भी बदहाली
लाखनी नगर पंचायत ने पहले लाखोरी रोड पर शहर से सटकर डम्पिंग यार्ड बनाया था, जिसे जगह कम पड़ने के कारण 3 साल पहले शहर से थोड़ा दूर स्थानांतरित किया गया। लाखांदुर शहर कि नगर पंचायत का डम्पिंग यार्ड शहर की सीमा में आने वाले झिरोबा वार्ड स्थित खाली जगह में चल रहा है, जो रिहायशी इलाके के करीब है। वहीं, पवनी शहर के डम्पिंग यार्ड की हालत भी बेहद खस्ता है। कुल मिलाकर, जिले का कचरा प्रबंधन तंत्र इस समय पूरी तरह रामभरोसे चल रहा है।
आरक्षित जमीन पर पार्क बनाने का खेल
साकोली के पटमैदान स्थित ठोस कचरा प्रबंधन केंद्र की आरक्षित जमीन का सीधा दुरुपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्य अधिकारी माधुरी मडावी के कार्यकाल में इस जगह पर एक चिल्ड्रन पार्क बनाया गया था। अब नगर परिषद ने उसी जगह पर दोबारा नमो उद्यान बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया है। जानकारों के अनुसार, कचरा प्रक्रिया प्लांट के लिए आरक्षित इस जमीन पर उद्यान बनाना नियमों के खिलाफ है।
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स्कूल और धार्मिक स्थल के पास डम्पिंग यार्ड
मोहाडी नगर पंचायत की ओर से शुरू किए गए डम्पिंग यार्ड के पास ही एक स्कूल और एक धार्मिक स्थल स्थित है। इसके कारण स्कूल आने वाले बच्चों और धार्मिक स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दिनभर तीव्र बदबू और प्रदूषण का सामना करना पड़ता है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
