नासिक विधान परिषद चुनाव का सस्पेंस खत्म; गोकुल गिते ने पीछे खींचे कदम, महायुति के नरेंद्र दराडे की राह आसान

Nashik MLC Election: नासिक विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय गोकुल गिते के हटने से राजनीतिक सस्पेंस खत्म हो गया है। महायुति के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद नरेंद्र दराडे की राह आसान हुई।
The suspense over Nashik MLC elections ends as independent candidate Gokul Gite withdraws his campaign, clearing the path for Mahayuti's Narendra Darade
गोकुल गिते , नरेंद्र दराडे (सोर्स: डिजाइन फोटो/ नवभारत)
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Nashik MLC Election Narendra Darade: नासिक विधान परिषद चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक सस्पेंस पर आखिरकार विराम लग गया है। निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिते ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया है और अपना चुनावी प्रचार कार्यक्रम पूरी तरह से स्थगित कर दिया है। इस फैसले के बाद चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव आया है और महायुति की स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है।

चुनावी घटनाक्रमः नामांकन से समर्थन तक

इस चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 4 जून थी। शुरुआत में कुल 9 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें से 6 ने नाम वापस ले लिए थे। मैदान में बचे 3 मुख्य उम्मीदवारों में महायुति के नरेंद्र दराडे, भाजपा के प्रसाद हिरे और निर्दलीय गोकुल गिते शामिल थे। हालांकि, भाजपा उम्मीदवार प्रसाद हिरे द्वारा पहले ही समर्थन की घोषणा के बाद सारा ध्यान गोकुल गीते की भूमिका पर टिका था।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार के सीधे हस्तक्षेप के बाद, गोकुल गिते ने चुनाव से हटने का निर्णय लिया। गुरुवार को भाजपा के पूर्व स्थायी समिति सभापति गणेश गिते के निवास पर मंत्री गिरीश महाजन, उदय सामंत, दादा भुसे और अन्य प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में इस निर्णय की आधिकारिक घोषणा की गई।

खरीद-फरोख्त पर भी लगेगी लगाम तकनीकी स्थिति

हालांकि गोकुल गीते ने अपना प्रचार अभियान रोक दिया है, लेकिन तकनीकी कारणों से उनका नाम मतपत्र पर बना रहेगा। गीते के मुकाबले से हटने के बाद चुनाव को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इससे 'घोड़ाबाजार' (राजनीतिक खरीद-फरोख्त) पर भी रोक लग सकती है।

इस फैसले से नरेंद्र दराडे का दूसरी बार विधान परिषद पहुंचने का मार्ग लगभग साफ हो गया है। यदि वे जीतते हैं, तो एक ही परिवार से दो विधायक (भाई किशोर दराडे के साथ) होने की अनूठी घटना देखने को मिलेगी।

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