कपास उत्पादकता सीमा बढ़ाने की मांग तेज, सांसद धोत्रे, विधायक सावरकर ने CM से हस्तक्षेप की अपील

MP Anup Dhotre: अकोला में कपास खरीद सीमा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। सांसद अनूप धोत्रे और विधायक रणधीर सावरकर ने CM से हस्तक्षेप कर सीमा 12 क्विंटल प्रति एकड़ करने की अपील की।
कपास उत्पादकता सीमा बढ़ाने की मांग तेज
कपास उत्पादकता सीमा बढ़ाने की मांग तेज (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Akola cotton Farmers: कपास उत्पादक किसानों को राहत देने के उद्देश्य से सांसद अनूप धोत्रे और विधायक रणधीर सावरकर ने कपास खरीद की उत्पादन सीमा बढ़ाने की मांग की है। वर्तमान में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) द्वारा प्रति एकड़ 5.60 क्विंटल की सीमा निर्धारित है, जिसे बढ़ाकर पिछले वर्ष की तरह न्यूनतम 12 क्विंटल प्रति एकड़ (30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) करने की मांग की गई है।

सांसद अनूप धोत्रे और विधायक रणधीर सावरकर ने इस संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा सीसीआई के महाप्रबंधक से चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य के कृषि विभाग ने 2025-26 के लिए कपास उत्पादकता 5.60 क्विंटल प्रति एकड़ दर्ज करते हुए इसे वस्त्रोद्योग मंत्रालय को भेजा है। इसी आधार पर सीसीआई ने प्रति हेक्टेयर 13.57 क्विंटल की सीमा तय की है। हालांकि अकोला जिला प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र है, जहां किसान औसतन 25 से 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन लेते हैं। इस कारण सीसीआई द्वारा निर्धारित सीमित खरीद से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

किसानों की मजबूरी

सीमा कम होने के कारण किसानों को निर्धारित मात्रा से अधिक कपास खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। इससे उनकी आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सांसद और विधायक ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए मुख्यमंत्री और सीसीआई अधिकारियों से सकारात्मक चर्चा की है। उन्होंने पुनः आग्रह किया है कि किसानों के हित में कपास खरीद सीमा को पिछले वर्ष की तरह बढ़ाया जाए, जिससे किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके और उन्हें खुले बाजार में नुकसान न उठाना पड़े।

जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका

कपास उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा के लिए दोनों जनप्रतिनिधि लगातार प्रयासरत हैं। उनका कहना है कि सीमा नहीं बढ़ाई गई तो जिले के हजारों किसानों को नुकसान होगा।इसलिए सीसीआई को अकोला जैसे प्रमुख कपास उत्पादक जिले की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीमा में संशोधन करना चाहिए। इस मांग को लेकर किसानों में उम्मीद जगी है कि सरकार शीघ्र निर्णय लेकर राहत प्रदान करेगी।

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