अकोला में एक ही दिन पांच बाल विवाह रोके, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
Akola Child Marriage Stopped: महाराष्ट्र के अकोला जिले में प्रशासन और बाल कल्याण समिति की संयुक्त कार्रवाई से बार्शीटाकली और अकोट तहसीलों में एक ही दिन होने वाले पांच बाल विवाह समय रहते रोक दिए गए।
- Written By: आंचल लोखंडे
Child Marriage (सोर्सः सोशल मीडिया)
Akot Child Marriage Prevention: बार्शीटाकली और अकोट तहसीलों में प्रशासन ने समय पर हस्तक्षेप कर एक ही दिन होने वाले पांच बाल विवाह रोकने में सफलता हासिल की। इस साहसिक कार्रवाई से पांच युवतियों का जीवन अंधकार से बच गया। अब तक जिले में आठ बाल विवाह रोकने में जिला बाल कल्याण समिति को सफलता मिली – है, ऐसी जानकारी समिति सदस्य प्रांजलि जयस्वाल ने दी।
मिली जानकारी के अनुसार, बार्शीटाकली तहसील के एक ही परिवार के दो भाई और एक बहन तथा अकोट तहसील के एक गांव की दो बालिकाओं का विवाह तय हुआ था। विवाह के लिए 400 से अधिक बाराती जमा हो चुके थे, बैंड-पार्टी तैयार थी और विधि-विधान शुरू होने ही वाले थे। इसी बीच “एक्सेस टू जस्टिस” संस्था को मिली गुप्त सूचना के आधार पर जिला महिला व बाल विकास कार्यालय, जिला बाल संरक्षण कक्ष और चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और विवाह रोक दिया।
बाल कल्याण समिति और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई
जांच में सामने आया कि पांच युवतियों में एक लड़की 16 वर्ष की, दो लड़कियां 17 वर्ष की, एक लड़का 18 वर्ष का और एक लड़का 19 वर्ष का था। बाल विवाह प्रतिबंधक कानून 2006 के अनुसार लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होना आवश्यक है। इस प्रकार यह विवाह पूरी तरह अवैध होता। कार्रवाई के दौरान यह भी पता चला कि दो लड़कियां कभी स्कूल नहीं गई, जबकि अन्य तीन ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।
सम्बंधित ख़बरें
Maharashtra Child Marriage: बाल विवाह को लेकर महाराष्ट्र सरकार का कड़ा रुख, अदिति तटकरे ने सेट किया टारगेट
अकोला जिला कारागृह में दो विचाराधीन कैदियों की लगातार मौत से मची खलबली, जेल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
अकोला की श्री गजानन पतसंस्था में 8.97 करोड़ की गड़बड़ी, अध्यक्ष और CEO गिरफ्तार
अकोला में पतसंस्था का 8.97 करोड़ का घोटाला: अध्यक्ष और सीईओ गिरफ्तार, 2500 निवेशकों की जमा पूंजी फंसी
दोनों पक्षों को दी गई कड़ी चेतावनी
मामला बाल कल्याण समिति के समक्ष रखा गया। समिति की अध्यक्षा और सदस्यों ने दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी देते हुए लड़कियों की शिक्षा शुरू करने का आदेश दिया। साथ ही, लड़कियों के 18 वर्ष और – लड़कों के 21 वर्ष पूरे होने तक विवाह न करने का लिखित आश्वासन पालकों से लिया गया। टीम ने पालकों को बाल विवाह के दुष्परिणाम समझाए और बताया कि यह कानूनन अपराध है, जिसमें दो वर्ष का कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
