अकोला में 77 SSC परीक्षा केंद्र बंद होने के कगार पर, CBSE में बढ़ते एडमिशन से राज्य बोर्ड पर असर

अकोला शहर में स्थित लगभग 77 एसएससी सेंटर बंद होने की कगार पर है। ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि अब लोग बड़ी संख्या में अपने बच्चों का एडमिशन SSC Board की जगह CBSE Board में करवा रहे हैं।
अकोला शहर में स्थित लगभग 77 एसएससी सेंटर बंद होने की कगार पर है। ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि अब लोग बड़ी संख्या में अपने बच्चों का एडमिशन SSC Board की जगह CBSE Board में करवा रहे हैं।
एसएससी बोर्ड सेंटर (सौ. सोशल मीडिया )
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Akola News In Hindi: महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षण मंडल द्वारा निर्धारित न्यूनतम छात्र संख्या के मानदंडों को पूरा न करने के कारण जिले के 77 माध्यमिक शालांत परीक्षा केंद्रों के बंद होने की संभावना जताई गई है।

इस संबंध में संबंधित केंद्र संचालकों को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनका केंद्र क्यों बंद न किया जाए।राज्य मंडल के अनुसार, शहरी क्षेत्र के परीक्षा केंद्रों के लिए न्यूनतम 200 विद्यार्थी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए न्यूनतम 125 विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य है।

फरवरी-मार्च 2025 में आयोजित होने वाली माध्यमिक शालांत परीक्षा के लिए अकोला शहर के 10 और ग्रामीण क्षेत्र के 67 परीक्षा केंद्र इन मानदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण इन केंद्रों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

केंद्र संचालकों को उपस्थित होने का आदेश

अमरावती विभागीय मंडल की सचिव जयश्री राऊत ने संबंधित केंद्र संचालकों को निर्देश दिया है कि वे गुरुवार, 4 सितंबर को सुबह 11:30 बजे टोपे नगर, अमरावती स्थित विभागीय कार्यालय में लिखित स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित हों। ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यार्थी अब कॉन्वेंट स्कूलों में प्रवेश लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षा दे रहे हैं। इससे राज्य मंडल के परीक्षा केंद्रों पर विद्यार्थियों की संख्या में कमी आई है।

न्यूनतम छात्र संख्या की शर्त में शिथिलता की मांग

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मराठी माध्यम और सेमी इंग्लिश स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट रही है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों को बंद करने की बजाय न्यूनतम छात्र संख्या की शर्त को शिथिल करने की मांग उठ रही है। यदि केंद्र बंद किए गए तो अन्य केंद्रों पर भीड़ बढ़ सकती है, जिससे विद्यार्थियों को असुविधा हो सकती है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस विषय पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई है ताकि परीक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके और विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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