50 साल पुराना विवाद बातचीत से सुलझा, दोनों समूहों में सुलह, बातचीत से खुला खेतों का रास्ता
Taklibhan Road Dispute: टाकलीभान गांव में खेत तक जाने वाली सड़क को लेकर 50 साल पुराना विवाद बातचीत और ‘विलेज फर्स्ट’ रुख से सुलझ गया, जिसमें दोनों पक्षों की सहमति से नया रास्ता खुल गया।
- Written By: आंचल लोखंडे
50 साल पुराना विवाद बातचीत से सुलझा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Ahilyanagar News: गांव में खेत तक जाने वाली सड़क को लेकर पिछले 50 वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार बातचीत से सुलझ गया। युवाओं के बीच बने नए गठबंधन और सकारात्मक संवाद के चलते दोनों समूहों के बीच सहमति बनी और समस्या का स्थायी समाधान निकल आया। इस फैसले से लाभान्वित किसानों ने नए गठबंधन के युवाओं की खुले दिल से सराहना की है।
गांव की एकता, स्थानीय नेताओं की प्रभावी नेतृत्व क्षमता और पत्रकारों की सकारात्मक भूमिका के कारण यह समाधान संभव हो पाया, जो अब पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।
दोनों समूहों के बीच अक्सर तनाव और झगड़े होते थे
बताया जाता है कि इस इलाके के करीब 40 किसान कई वर्षों से भूसर व्यापारी जितेंद्र मिरिकर के खेत के बीच से गैर-कानूनी तरीके से आना-जाना कर रहे थे। यह रास्ता गांव का पुराना मुख्य मार्ग था, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज न होने के कारण विवाद की स्थिति बनी रहती थी। इसी वजह से गांव में दोनों समूहों के बीच अक्सर तनाव और झगड़े होते थे।
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सुलह कराने की कोशिश
समय-समय पर गांव के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। विवाद बढ़ने पर ज़मीन मालिक जितेंद्र मिरिकर और सड़क से लाभ लेने वाले किसान रामकृष्ण गायकवाड़ व सुरेश गायकवाड़ ने अपनी शिकायत मार्केट कमेटी के निदेशक मयूर पटारे, वरिष्ठ नेता ज्ञानदेव सालुंके, शिवाजी शिंदे, चंद्रकांत लांडगे, रामेश्वर अरगड़े, अभिजीत लेलकर, ग्राम पंचायत सदस्य सुनील बोडखे, बालासाहेब अहेर, कृष्ण वेताल और माकंद हापसे के समक्ष रखी।
लगातार चार दिनों तक संयमित और निष्पक्ष बातचीत
इस विवाद को सुलझाने के लिए लगातार चार दिनों तक वादी और प्रतिवादी पक्षों के साथ बैठकें की गईं। पूरे संयम, धैर्य और निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ संवाद कर एक ऐसे समाधान पर सहमति बनी, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य रहा।
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‘विलेज फर्स्ट’ रहा निर्णायक
संयमित मध्यस्थता, सकारात्मक सोच और ‘विलेज फर्स्ट’ के सिद्धांत को प्राथमिकता देने के कारण अंततः सभी ने इस समाधान को स्वीकार कर लिया। बैठक में तय फैसले के अनुसार, जितेंद्र मिरिकर ने अपने खेत के पश्चिमी हिस्से से 12 फीट चौड़ी और लगभग 500 फीट लंबी सड़क मुफ्त में देने पर सहमति दी। वहीं, लाभार्थी किसानों ने आपसी सहयोग से तुरंत सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। लाभार्थी किसानों ने इस ऐतिहासिक समाधान की सराहना करते हुए खुशी व्यक्त की है।
