Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

Ahilyanagar News: निकाय चुनाव में राम शिंदे बनाम रोहित पवार की सीधी टक्कर, गुटों की रचना बन सकती है बड़ा मुद्दा

अहिल्यानगर जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की तैयारियों के बीच जामखेड तालुका एक बार फिर राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बनने जा रहा है। मुकाबला केवल सीटों का नहीं, बल्कि सत्ता की पकड़ और राजनीतिक प्रभाव की गहराई नापने का है।

  • By आंचल लोखंडे
Updated On: Jun 21, 2025 | 04:56 PM

निकाय चुनाव में राम शिंदे बनाम रोहित पवार की सीधी टक्कर। (सौजन्यः सोशल मीडिया)

Follow Us
Close
Follow Us:

अहिल्यानगर: जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की तैयारियों के बीच जामखेड तालुका एक बार फिर राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बनने जा रहा है। मुकाबला केवल सीटों का नहीं, बल्कि सत्ता की पकड़ और राजनीतिक प्रभाव की गहराई नापने का है। एक ओर राज्य की सत्ताधारी महायुति गठबंधन के प्रतिनिधि और वर्तमान जिला परिषद सभापति प्रो. राम शिंदे हैं, तो दूसरी ओर युवा नेतृत्व और लोकप्रिय चेहरा विधायक रोहित पवार, जो महा विकास आघाड़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बार लड़ाई जितनी मतदान केंद्रों पर दिखेगी, उससे कहीं अधिक गुट-वार्ड रचना की नीति और राजनीतिक चालबाज़ी में नजर आएगी।

राज्य सरकार ने हाल ही में सभी जिला परिषदों और पंचायत समितियों के गुटों की संख्या घोषित की है। हैरानी की बात यह है कि यह वही संख्या है, जो वर्ष 2022 में तत्कालीन महा विकास आघाड़ी सरकार द्वारा तय की गई थी। अब उसी के आधार पर नए सिरे से गुट-वार्ड पुनर्रचना की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महायुति सरकार ने पूर्ववर्ती आघाड़ी सरकार के गुट निर्धारण को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन अब असली लड़ाई इस बात की है कि किस तरह गांवों को जोड़ा या हटाया जाए, ताकि राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष में किए जा सकें।

जामखेड में तीसरे गुट की वापसी से इच्छुकों में उत्साह

2015 से पहले जामखेड, जवला और खर्डा यह तीन गुट हुआ करते थे। बाद में जामखेड को नगर परिषद का दर्जा मिलते ही वह हिस्सा जिला परिषद क्षेत्र से बाहर हो गया, और केवल दो गुट ही शेष रह गए। वर्ष 2022 में महा विकास आघाड़ी सरकार द्वारा तीसरे गुट को पुनः शामिल करने की कोशिश हुई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। अब एक बार फिर तीसरे गुट की औपचारिक घोषणा हो चुकी है, जिससे स्थानीय नेताओं और इच्छुकों में संतोष की लहर है। यह नया गुट कई राजनीतिक समीकरणों को पलट सकता है।

सम्बंधित ख़बरें

कल्याण-डोंबिवली मनपा चुनाव: वोटर स्लिप से स्ट्रांगरूम तक…, चुनाव अधिकारी ने दिए कई निर्देश

बदलापुर नगर परिषद उपाध्यक्ष चुनाव: BJP-NCP ने प्रियंका दामले को उतारा मैदान में, 9 जनवरी को फैसला

‘पुणेकर समझदार हैं’, उद्धव ठाकरे के बयान पर जमकर बरसे मुरलीधर मोहोल, काेरोना काल की दिलाई याद

भाजपा में शामिल हुए अंबरनाथ के 12 पार्षद होंगे अयोग्य? दल-बदल पर कांग्रेस बड़े एक्शन की तैयारी में

सत्ता परिवर्तन, चुनावी माहौल और रणनीतिक दबाव

कोरोना महामारी और ओबीसी आरक्षण को लेकर उपजे विवादों के चलते राज्य में चार वर्षों तक स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव स्थगित रहे। इस अवधि में राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ जिससे अब गुट-वार्ड रचना पर सत्ता का सीधा प्रभाव दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चार माह के भीतर चुनाव कराने के आदेश दिए, जिसके बाद राज्य प्रशासन ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। हालांकि चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर ही कराए जा रहे हैं, जबकि बीते 14 वर्षों में जनसंख्या में तेज़ वृद्धि हुई है। नई जनगणना न होने से यह चुनाव पुराने आंकड़ों पर आधारित होंगे।

सरकारी ज़मीन हड़पने की साजिश,कमलेश चौधरी पर फर्जीवाड़े का आरोप, मकोका के तहत कार्रवाई की मांग

गांवों के समायोजन में दिख रही है राजनीतिक दखलअंदाज़ी

अब गुट और वार्डों का निर्धारण केवल प्रशासनिक काम नहीं रहा, बल्कि यह पूरी तरह एक राजनीतिक कवायद बन चुका है। जिन क्षेत्रों में किसी पार्टी विशेष का प्रभाव अधिक है, वहां उसी के अनुसार गांवों का समायोजन किया जा रहा है। गांवों को जोड़ना या हटाना अब केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ और वोट बैंक के हिसाब से किया जा रहा है। यही वजह है कि हर छोटे बदलाव पर राजनीतिक इच्छुकों की पैनी नजर बनी हुई है।

शिंदे बनाम पवार: दो दिग्गज, एक चुनावी मैदान

पिछली विधानसभा चुनाव में रोहित पवार ने प्रो. राम शिंदे को मात्र 1243 मतों से पराजित किया था। हालांकि यह हार बहुत कम अंतर की थी, लेकिन इसके बाद जब सत्ता महायुति के हाथ में आई, तो प्रो. शिंदे को जिला परिषद का सभापति पद सौंपा गया, जिससे उनका राजनीतिक वज़न फिर से बढ़ गया। अब जब चुनाव करीब हैं, यह मुकाबला सिर्फ कार्यकर्ताओं का नहीं, बल्कि दो प्रमुख नेताओं की प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन चुका है। एक ओर सत्ता और संगठन का समर्थन प्राप्त शिंदे हैं, तो दूसरी ओर युवाओं में लोकप्रिय और जमीनी नेता रोहित पवार हैं।

‘सीधा और तीखा’ है मुकाबला

यह चुनाव निश्चित रूप से जामखेड की राजनीतिक दिशा और दोनों नेताओं के भविष्य को तय करने वाला साबित हो सकता है। जामखेड का यह जिला परिषद चुनाव केवल एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों, संगठनात्मक शक्ति और रणनीतिक निर्णयों का इम्तिहान है। गुट-वार्ड रचना से लेकर वोटिंग पैटर्न तक, हर बिंदु अब सत्ता की बिसात पर रखा जा चुका है और इस बार मुकाबला सच में ‘सीधा और तीखा’ है।

Shinde vs pawar direct contest in ahilyanagar zilla parishad elections

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jun 21, 2025 | 04:56 PM

Topics:  

  • Ahilyanagar
  • Maharashtra Local Body Elections
  • Ram Shinde
  • Rohit Pawar

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.