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गडाख को अब ‘मशाल’ की मुश्किल! नेवासे की राजनीति में मातोश्री पर बंधी शिवबंधन की डोर पड़ने लगी ढीली
- Written By: आंचल लोखंडे
Shankarrao Gadakh: पूर्व मंत्री शंकरराव गडाख ने नेवासे नगर परिषद चुनाव क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी के झंडे तले लड़ने का ऐलान किया, जिससे उबा ठा शिवसेना में हलचल मच गई।

गडाख को अब 'मशाल' की मुश्किल! (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nevasa Politics Update: पूर्व मंत्री और उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबा ठा) शिवसेना के नेता शंकरराव गडाख ने आज घोषणा की कि वे नेवासे नगर परिषद का चुनाव अपने पुराने क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी के झंडे तले लड़ेंगे। इस घोषणा के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे ‘मशाल’ चुनाव चिन्ह को त्याग चुके हैं। विधानसभा चुनाव के बाद उबा ठा (उद्धव ठाकरे गट) से कई नेताओं ने अन्य दलों में जाना पसंद किया, और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एक के बाद एक झटके इस गुट को लग रहे हैं।
अहिल्यानगर में गडाख को उबा ठा का प्रमुख चेहरा माना जाता है। 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने नेतृत्व में क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी से चुनाव लड़ा और 2014 की हार का बदला चुकाया। इसके बाद राज्य में ठाकरे ने भाजपा से नाता तोड़कर महा विकास आघाड़ी में प्रवेश किया। उस दौरान शिवसेना की ओर से जो कुछ मंत्री पद दिए गए, उनमें से एक गडाख को मिला। मंत्री बनने के बाद वे मातोश्री जाकर शिवबंधन बांधकर आधिकारिक रूप से ठाकरे गुट से जुड़े। हालांकि, नेवासे को छोड़कर जिले में उनकी संगठन और कार्यकर्ताओं से सीमित नातेदारी रही।
क्या नेवासे से ‘मशाल’ चिन्ह होगा गायब?
अहिल्यानगर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई कार्यकर्ता पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन गडाख ने इस टूट को रोकने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया। भले ही उन्होंने विधानसभा चुनाव मशाल चिन्ह पर लड़ा था, लेकिन हार के बाद इस चिन्ह से उनका नाता लगभग समाप्त हो गया था। इसी बीच मातोश्री पर बांधी गई शिवबंधन की डोर ढीली पड़ने के संकेत मिलने लगे। आज सोनई में आयोजित सभा में उन्होंने इस बात पर मुहर लगा दी। उन्होंने घोषणा की कि नेवासे नगर परिषद का चुनाव क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी के बैनर तले लड़ा जाएगा। मंच पर उबा ठा के तालुका प्रमुख मौजूद थे, लेकिन इस सभा के निमंत्रण में जिला प्रमुख का नाम शामिल था या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो सका।
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उबाठा की आधिकारिक भूमिका क्या है?
पूर्व मंत्री शंकरराव गडाख की इस घोषणा पर उबाठा के स्थानीय और राज्यस्तरीय नेताओं की सहमति है या नहीं, यह अभी सामने नहीं आया है। कुछ पदाधिकारियों ने कहा कि वरिष्ठ नेता इस पर विचार करेंगे, और फिलहाल कोई टिप्पणी करने से बचा। अब देखना यह है कि उबाठा गडाख के फैसले के साथ जाएगा या ‘मशाल’ फिर से प्रज्वलित करेगा।
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निष्ठावान उबा ठा शिवसैनिकों में बेचैनी
अगर नेवासे नगर परिषद का चुनाव क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी के झंडे तले लड़ा गया तो वहां ‘मशाल’ चिन्ह नहीं रहेगा। जबकि दूसरी ओर उद्धव ठाकरे कार्यकर्ताओं से गांव-गांव, गली-मोहल्लों में पार्टी की विचारधारा पहुंचाने का आह्वान कर रहे हैं। ऐसे में मशाल न दिखने से निष्ठावान उबा ठा शिवसैनिकों में नाराजगी और बेचैनी है।
निर्णय केवल नगर परिषद तक सीमित नहीं?
गडाख ने भले ही नेवासे नगर परिषद चुनाव के लिए क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी का झंडा उठाने की घोषणा की हो, लेकिन माना जा रहा है कि यह सिर्फ शुरुआत है। संभावना है कि वे आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव भी इसी झंडे के तहत लड़ेंगे। राजनीतिक हलकों में यह भी कयास लगाया जा रहा है कि चुनाव के बाद सत्ता में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए गडाख अपना खुद का दल मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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