‘शनैश्वर’ ट्रस्टियों को ‘धर्मादाय’ की नोटिस; शुक्रवार को मुंबई में होगी सुनवाई
Shani Shingnapur: श्री शनैश्वर देवस्थान के ट्रस्टी फर्जी ऐप और अनावश्यक भर्ती जैसे कई कारणों से जांच का सामना कर रहे हैं। सरकार ने एक साल पहले इस भर्ती को लेकर एक जांच समिति गठित की थी।
- Written By: आंचल लोखंडे
शनि शिंगणापुर के 'शनैश्वर' ट्रस्टियों को 'चैरिटी' नोटिस (सौजन्यः सोशल मीडिया)
अहिल्यानगर: शनि शिंगणापुर स्थित श्री शनैश्वर देवस्थान से जुड़े घोटाले की राज्य में चर्चा हो रही है, वहीं धर्मादाय आयुक्त ने सोमवार को देवस्थान के न्यासियों को स्वतः संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी कर ‘कारण बताओ’ का आदेश दिया है। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि विश्वस्तों को शुक्रवार को मुंबई में सुनवाई के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, शनि शिंगणापुर स्थित श्री शनैश्वर देवस्थान के ट्रस्टी फर्जी ऐप और अनावश्यक भर्ती जैसे कई कारणों से जांच का सामना कर रहे हैं। सरकार ने एक साल पहले इस भर्ती को लेकर एक जांच समिति गठित की थी। बता दें कि आस्था के सर्वोच्च प्रतीक शनि शिंगणापुर मंदिर में 2,474 फर्जी कर्मचारी दिखाकर मंदिर का पैसा अपने कर्मचारियों के खातों में वेतन के रूप में भेजने का यह मामला है।
कर्मचारियों की भर्ती और फर्जी ऐप
चैरिटी संयुक्त आयुक्त एस.एस. बुक्के ने स्वयं मंदिर का दौरा किया था और इस मामले में एक जांच रिपोर्ट तैयार की थी। इसे सरकार को भेजा गया था। हाल ही में चल रहे सत्र में, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे सदन में पेश करते हुए मंदिर के विभागों और वहां तैनात कर्मचारियों के सामने आईना दिखाया था।
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आयुक्त का खुद संज्ञान नोटिस
इस बार साफ़ था कि उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया है। इस बीच, सूत्रों से पता चला है कि सोमवार को राज्य धर्मादाय आयुक्त अमोघ कलोटी ने आगे आकर मंदिर के ट्रस्टियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि इस नोटिस में पूछा गया है कि ट्रस्ट अधिनियम, 1950 की धारा 41डी के तहत ट्रस्टी होने के नाते उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों न की जाए। 18 जुलाई को मुंबई में सुनवाई होगी और सबकी नज़र इस बात पर होगी कि इसमें क्या पक्ष रखा जाता है।
दिसंबर के बाद मंदिर सरकार के नियंत्रण में होगा
वर्तमान विश्वस्तों का कार्यकाल दिसंबर 2025 तक है। इसलिए, उसके बाद मंदिर सरकार के नियंत्रण में आ जाएगा। चर्चा है कि राज्य सरकार मंदिर का अधिग्रहण करते समय मौजूदा कर्मचारियों को भी सेवा में शामिल करेगी। इसलिए, इस पर पहले से ही विचार-विमर्श चल रहा है कि क्या मौजूदा दो हज़ार कर्मचारियों को सेवा में लिया जाएगा या पहले कर्मचारियों की संख्या कम की जाएगी और फिर आवश्यक कर्मचारियों को लिया जाएगा।
