अहिल्यानगर के अकोले में 55 नाबालिग बनी मां, अदिति तटकरे के विभाग पर उठा सवालिया निशान
Akole Latur Aditi Tatkare Underage Mothers: अहिल्यानगर के अकोले तालुका में 55 नाबालिग लड़कियों के मां बनने के खुलासे से हड़कंप। मंत्री अदिति तटकरे के महिला एवं बाल विकास विभाग पर उठे सवाल।
- Written By: अनिल सिंह
55 नाबालिग माताओं के खुलासे से हिला महाराष्ट्र, अदिति तटकरे पर उठा सवाल (फोटो क्रेडिट-X)
Akole Latur Underage Mothers Case: महाराष्ट्र को प्रगतिशील और समाज सुधारकों का राज्य माना जाता है, लेकिन अहिल्यानगर जिले के आदिवासी और ग्रामीण अंचल वाले अकोले तालुका से आई यह रिपोर्ट बेहद विचलित करने वाली है। विभाग के सर्वे के मुताबिक, अकोले तालुका के भीतर बड़े पैमाने पर नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरन बाल विवाह और शारीरिक शोषण (यौन उत्पीड़न) की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। चूंकि ये मामले अंदरूनी गांवों के थे, इसलिए मुख्यधारा के प्रशासन तक इनकी भनक काफी देर से पहुंची।
मुंबई में आयोजित हुई आयोग की इस विशेष और बंद कमरे की सुनवाई में जिला कलेक्टर, जिला सर्जन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और जिला बाल संरक्षण अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया था। आयोग के सचिव पंकज देशमुख ने अधिकारियों की क्लास लगाते हुए पूछा कि जब ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ जैसा राष्ट्रीय अभियान चल रहा है, तब एक ही तालुका के भीतर इतनी बड़ी संख्या में मासूम बच्चियां गर्भवती कैसे हो गईं और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों ने इसकी रिपोर्ट समय पर पुलिस को क्यों नहीं दी?
ग्राम सेवकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर तय होगी जवाबदेही
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली सरकारी एजेंसियां बाल विवाह की खुफिया जानकारी छुपाती हैं या अनदेखा कर देती हैं। जिला बाल संरक्षण अधिकारी प्रशांत गायकवाड़ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अकोले तालुका में 55 नाबालिग लड़कियों के मां बनने की सूचना बेहद गंभीर है। अब भविष्य में ग्राम सेवकों, आंगनवाड़ी सेविकाओं और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। अगर किसी भी गांव में कोई नाबालिग लड़की गर्भवती पाई जाती है, तो उसकी सूचना तुरंत बाल संरक्षण समिति को देना अनिवार्य होगा।”
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आदिवासी क्षेत्रों के लिए जारी होंगे विशेष दंडात्मक नियम
महिला एवं बाल विकास अधिकारी संजय कदम ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन ने इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। आयोग ने मांग की है कि ग्राम स्तर पर निष्क्रिय पड़ीं ‘बाल संरक्षण समितियों’ को तुरंत पुनर्जीवित किया जाए और उन्हें इस कुप्रथा के खिलाफ लड़ने के लिए विशेष वित्तीय बजट (निधि) उपलब्ध कराया जाए। अकोले तालुका के भीतर बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, विवाह कराने वाले पंडित या काजी और शादी में शामिल होने वाले अतिथियों के खिलाफ भी अब सीधे फौजदारी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
अदिति तटकरे के इस्तीफे की मांग पर राजनीति तेज
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सामने आए इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर अब महाराष्ट्र की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सीधे महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार को घेरा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महाराष्ट्र में बच्चियों की सुरक्षा के प्रति सरकार की घोर उदासीनता को दर्शाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कागजी दावों से आगे बढ़कर इन 55 पीड़ित बच्चियों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
