

Aditi Tatkare PS Transfer Racket News: महाराष्ट्र की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अदिति तटकरे के निजी सचिव राजेश गायकवाड इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं।
उन पर महिला अधिकारियों से अश्लील भाषा में बात करने और तबादला रैकेट चलाने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। इस खुलासे के बाद मंत्रालय के गलियारों में हड़कंप मच गया है और खुद मंत्री अदिति तटकरे के भी मुश्किल में पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
महिला एवं बाल विकास, राज्य राजपत्रित अधिकारी संगठन ने एक निवेदन के जरिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शिकायत भेजी है। इसमें गायकवाड पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संगठन का कहना है कि गायकवाड अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मंत्री की जानकारी के बिना गंभीर अनियमितताएं कर रहे हैं।
कई अधिकारी व्यावसायिक नुकसान के डर से उनके दुर्व्यवहार को चुपचाप सहने पर मजबूर हैं। संगठन ने बताया कि गायकवाड महिला अधिकारियों के साथ अत्यंत अपमानजनक और लज्जास्पद व्यवहार करते हैं। उन्हें बार-बार अश्लील और आपत्तिजनक शब्दों का सामना करना पड़ता है।
गायकवाड का महिलाओं के प्रति नजरिया संकुचित, असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना बताया गया है। इसके अलावा, अल्पसंख्यक और सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के अधिकारियों के साथ भी वे भेदभावपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार करते हैं।
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि गायकवाड ने विभाग में तबादलों और प्रतिनियुक्ति के मामलों में अपनी एक समानांतर व्यवस्था यानी रैकेट खड़ा कर लिया है। इसके जरिए वे अधिकारियों का आर्थिक शोषण करते हैं, उनके खिलाफ बदनाम करने वाली कहानियां गढ़ते हैं और जो अधिकारी उनकी बात नहीं मानते, उन्हें जानबूझकर अनुचित और प्रतिकूल स्थानों पर तैनात करवाते हैं।
संगठन ने बताया कि इन आरोपों के कागजी और इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरह के साक्ष्य उपलब्ध हैं। संगठन ने मांग की है कि गायकवाड को तत्काल पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ उच्चस्तरीय जांच बैठाई जाए।
राकां (एसपी) की महिला प्रदेशाध्यक्ष रोहिणी खडसे ने इस मामले पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि गायकवाड 2019 से इस विभाग में निजी सचिव के तौर पर कार्यरत है और अनेक महिलाओं ने उसकी बार-बार शिकायत की है, लेकिन मंत्री अदिति तटकरे ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। क्या अदिति तटकरे का गायकवाड को संरक्षण प्राप्त है और क्या उनके बीच कोई आर्थिक लेन-देन है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास जैसे संवेदनशील विभाग में इस तरह की हरकतें होना अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।