Sidhi News: ‘जनसंख्या के हिसाब से सामान्य है…’, 53 माताओं की मौत पर सिविल सर्जन का बेशर्म बयान
Sidhi Civil Surgeon Statement: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में 1 साल में 53 प्रसूताओं की मौत पर मचा बवाल, सिविल सर्जन एस.बी. खरे ने मौतों को बताया सामान्य, बयानों पर भड़का भारी जनाक्रोश।
- Reported By: अर्पित पाण्डेय | Edited By: सजल रघुवंशी
सिधी के सिविल सर्जन का बेशर्म बयान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sidhi Maternal Mortality Statement: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बीते एक वर्ष के दौरान 53 प्रसूताओं की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर उठे सवालों के बीच जिले के सिविल सर्जन एस.बी. खरे का बयान विवादों में आ गया है। उन्होंने इन मौतों को जिले की आबादी के अनुपात में “सामान्य” बताया है। उनके इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी इस बयान पर आपत्ति जता रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल में जिलेभर में 53 महिलाओं की प्रसव के दौरान या उससे जुड़े कारणों से मौत हुई। ये वे महिलाएं थीं जो एक नए जीवन को जन्म देने की तैयारी में थीं, लेकिन खुद जीवन की जंग हार गईं। मामला सामने आने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि स्वास्थ्य विभाग इन घटनाओं की समीक्षा करेगा और मौतों के कारणों की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगा। हालांकि, सिविल सर्जन के बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
जनसंख्या को देखते हुए 53 मौतें सामान्य हैं- सिविल सर्जन
सिविल सर्जन का कहना था कि जिले की जनसंख्या को देखते हुए 53 मौतें सामान्य हैं लेकिन इस टिप्पणी ने उन परिवारों की पीड़ा को और बढ़ा दिया है जिन्होंने अपनी बेटियों, बहुओं और पत्नियों को खो दिया। कई लोगों का मानना है कि मातृ मृत्यु को सिर्फ आंकड़ों के आधार पर नहीं देखा जा सकता।
सम्बंधित ख़बरें
CM मोहन यादव ने 900 एमएसएमई यूनिट को दिए 360 करोड़, कहा- सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश
MP News: पति की मौत का सदमा नहीं सह पाई पत्नी! मां ने दो बच्चों के साथ खाया जहर; महिला की मौत
इंदौर की ‘छप्पन दुकान’ की तर्ज पर तैयार हुआ उज्जैन का नैवेद्य लोक; 28 हजार वर्गफीट में विकसित हुआ फूड हब
डिंडोरी में आधी रात को संग्राम, कलेक्टर से मिलने की जिद पर फर्श पर बैठे रहे BJP के दिग्गज; जानें पूरा मामला
मातृ मृत्यु दर स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम पैमाना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का आकलन करने में मातृ मृत्यु दर सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक होती है। केंद्र और राज्य सरकारें इस दर को कम करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती हैं और कई योजनाएं संचालित करती हैं। ऐसे में यदि एक जिले में एक वर्ष के भीतर 53 महिलाओं की मौत हो जाती है, तो इसे गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि हर मातृ मृत्यु के पीछे कारणों की गहन जांच आवश्यक होती है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जवाबों का इंतजार, जिम्मेदारी तय करने की मांग
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन 53 मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। क्या महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पाया? क्या अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों या आवश्यक संसाधनों की कमी थी? क्या प्रसव के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही हुई? फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं।
यह भी पढ़ें: CM मोहन यादव ने 900 एमएसएमई यूनिट को दिए 360 करोड़, कहा- सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश
सिविल सर्जन के बयान ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और क्या 53 माताओं की मौत के पीछे की सच्चाई सामने आ पाएगी।
