घरौंडा शिव महापुराण विवाद: पूर्व आयोजक सतीश कुमार का पलटवार, पंडित प्रदीप मिश्रा पर लगाए गंभीर आरोप
Shiv Mahapuran Katha Dispute: पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। आयोजक सतीश कुमार ने पंडित प्रदीप पर पैसों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
- Written By: प्रीतेश जैन
पंडित प्रदीप मिश्रा और आयोजक सतीश कुमार (फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन)
Pandit Pradeep Mishra Controversy: पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। कथावाचक की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूर्व मुख्य आयोजक सतीश कुमार (विवेकानंद चाइल्ड सोशल वेल्फेयर सोसायटी) ने सामने आकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। मीडिया से बात करते हुए सतीश ने सीहोर मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगाए और पैसों के लेन-देन का पूरा ब्योरा पेश किया।
सतीश कुमार ने बताया कि यह कथा यम दृष्टि फाउंडेशन के दंडी स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज के संकल्प से शुरू हुई थी। उन्होंने दावा किया कि कथा बुक करने के लिए सीहोर की ‘श्री विठ्ठलेस सेवा समिति’ के खाते में कुल 27 लाख रुपए (26 फरवरी को 2 लाख और 13 अप्रैल को 25 लाख) आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए गए थे।
पंडित प्रदीप मिश्रा पर भी आरोप
सतीश का आरोप है कि दिल्ली के रोहिणी में कथा के दौरान उन पर पेमेंट के लिए भारी दबाव बनाया गया। करीब 50 बार कॉल आए और पैसे न देने पर पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा ऑनलाइन आकर कथा रद्द करने की चेतावनी तक दी गई।
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पास बेचने के आरोप बेबुनियाद, 40 लाख की मांग
वीआईपी पास बेचने के आरोपों पर सतीश ने कहा कि ये आरोप पूरी तरह निराधार हैं और यदि किसी के पास सबूत है तो वह सामने लाए। उन्होंने बताया कि बुकिंग और तैयारियों में उनके अब तक 35 से 40 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। उन्होंने नई आयोजन कमेटी से अपने पैसे वापस करने की मांग की है। 14 मई के विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भीड़ और हंगामे के दौरान पीछे से निकलते वक्त सीढ़ियों से कूदने के कारण उनके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए थे।
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आरोपों को नकार चुके हैं पंडित प्रदीप मिश्रा
इससे पहले पंडित प्रदीप मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया था कि कथा की कोई फिक्स फीस (जैसे 1.21 करोड़ या 71 लाख) नहीं होती। आयोजक अपनी क्षमता से खर्च करते हैं। उन्होंने वीआईपी पास बेचने या चंदा लेने की बात को पूरी तरह नकारा था और कहा था कि व्यवस्थाएं स्थानीय आयोजकों की होती हैं।
