Twisha Sharma Case Exclusive Report: भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी CBI के हाथों में पहुंच गई है। CBI इस केस की तह तक जाने के लिए हर एंगल से जांच में जुटी हुई है। इस बीच मामले को लेकर कानूनी और जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आ रहे हैं। मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अब तक नहीं मिले हैं। ऐसे में जांच एजेंसी इन सभी सवालों के जवाब तलाश रही है।
इस पूरे मामले पर जबलपुर के कानूनी विशेषज्ञ और एडवोकेट दिनेश उपाध्याय ने विस्तृत राय दी है। उन्होंने कहा कि ट्विशा शर्मा की आत्महत्या का मामला सामान्य घटना की तरह ही देखा जा सकता है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं को लेकर पहले से कानून में स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, जिसमें कहा गया है कि यदि शादी के सात साल के भीतर किसी महिला की मौत होती है या वह आत्महत्या करती है तो जांच के दौरान सबसे पहले परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जाती है।
दिनेश उपाध्याय के अनुसार इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शादी के बाद से ही ट्विशा शर्मा को प्रताड़ित किया जा रहा था, तो उसने पहले शिकायत क्यों नहीं की और उसके परिवार ने भी उस समय कोई ऑब्जेक्शन क्यों नहीं उठाया, जबकि ट्विशा और उसका परिवार कानूनी प्रक्रिया से परिचित बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि अब मीडिया के सामने यह बातें रखी जा रही हैं तो यह भी जांच का हिस्सा होना चाहिए कि पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि समर्थ सिंह के परिवार पर जांच और साक्ष्यों को प्रभावित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो यह गंभीर बात है। उनका कहना है कि घटना के 15 दिन बाद तक जांच में देरी और शव का दूसरा पोस्टमार्टम न होना भी ऐसे पहलू हैं, जिनसे साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इतने दिनों तक ट्विशा के परिवार ने भी कोई सक्रिय कार्रवाई नहीं की।
मामले में यह भी चर्चा है कि गिरिबाला सिंह की घटना के दूसरे दिन ही अग्रिम जमानत हो गई थी। उन्हें बयान देने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं गईं, जबकि उनका कहना है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। यदि पुलिस की कार्रवाई में उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उनकी अभी तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई, यह सवाल भी उठ रहे हैं। दिनेश उपाध्याय ने आगे कहा कि कोर्ट ने इस मामले में बहुत तेजी से सुनवाई की है और याचिकाओं को तुरंत स्वीकार कर सुनवाई और कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार न्यायालय शुरू से ही इस मामले में गंभीर रहा है।
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उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से समाज को सबक लेना चाहिए। यह मामला सकारात्मक मानसिकता वालों के लिए सीख है कि ऐसी घटनाएं परिवार में न हों और होने पर समय पर कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं नकारात्मक या आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोग ऐसे मामलों से कानून की खामियों को समझने की कोशिश कर सकते हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। फिलहाल ट्विशा शर्मा की जांच CBI के अधीन जारी है और सभी पहलुओं पर गहन जांच की जा रही है।