Congress OBC Politics: 'कर्नाटक में सिद्दरमैया की विदाई? मध्य प्रदेश के इन OBC नेताओं की खुल सकती है किस्मत!

MP Congress OBC leaders: राष्ट्रीय स्तर पर OBC वैक्यूम भरने के लिए मध्य प्रदेश के दिग्गजों पर दांव खेल सकती है दिल्ली; जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव की बढ़ेगी पूछपरख।
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सिद्दरमैया, जीतू पटवारी , कमलेश्वर पटेल , अरुण यादव ,सोर्स : सोशल मीडिया मीडिया
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Congress OBC News: देश की सियासत में इस समय सबसे बड़ी हलचल दक्षिण के राज्य कर्नाटक से आ रही है, जहां मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के सियासी भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। चर्चा है कि आलाकमान उन्हें दिल्ली लाकर राज्यसभा भेज सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कर्नाटक की इस हलचल का सीधा कनेक्शन मध्य प्रदेश की राजनीति और वहां के ओबीसी (OBC) नेताओं से जुड़ा है?

आइए समझते हैं कि कैसे सिद्दरमैया के हटने का फायदा एमपी के पिछड़े वर्ग के नेताओं को राज्यसभा के जरिए मिल सकता है..."

मध्य प्रदेश में ओबीसी की ताकत

मध्य प्रदेश की आबादी में ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। फिलहाल एमपी कांग्रेस की कमान जीतू पटवारी के हाथों में है, जो खुद पिछड़े वर्ग से आते हैं।इसके अलावा विंध्य के कद्दावर नेता कमलेश्वर पटेल ,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की गिनती बड़े ओबीसी नेताओ में होती है ।

राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी संतुलन

सिद्दरमैया कांग्रेस के सबसे कद्दावर और बड़े ओबीसी चेहरों में से एक हैं। अगर वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटते हैं, तो कांग्रेस के पास राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा 'ओबीसी वैक्यूम' (OBC Vacuum) पैदा हो जाएगा। पार्टी इस समय देश भर में 'जातिगत जनगणना' और 'पिछड़ों के हक' के मुद्दे पर राजनीति कर रही है। ऐसे में सिद्दरमैया की कमी को पूरा करने के लिए कांग्रेस को हिंदी बेल्ट, खासकर मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ओबीसी चेहरों पर बड़ा दांव खेलना ही होगा।

राज्यसभा का समीकरण और कांग्रेस का दांव

आने वाले समय में जब भी मध्य प्रदेश से राज्यसभा की सीटें खाली होंगी, कांग्रेस आलाकमान किसी कद्दावर ओबीसी नेता को दिल्ली भेजने की रणनीति अपनाएगा। इससे पार्टी एक तीर से दो निशाने साधेगी—पहला, राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़े वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का संदेश और दूसरा, मध्य प्रदेश में बीजेपी के मजबूत ओबीसी वोट बैंक में सेंधमारी।

किस नेता की चमकेगी किस्मत

साफ है कि राजनीति में कोई भी घटनाक्रम किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहता। कर्नाटक में होने वाला कोई भी फेरबदल दिल्ली के रास्ते होते हुए मध्य प्रदेश के समीकरणों को जरूर प्रभावित करेगा। अब देखना यह है कि कांग्रेस आलाकमान राज्यसभा के इस दांव के जरिए मध्य प्रदेश के किस पिछड़े वर्ग के नेता की किस्मत चमकाता है।हालांकि अभी तक इस रेस में समान्य वर्ग से आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे ऊपर है।

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