मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल बिक्री पर सख्ती, तेल कंपनियों ने पंपों पर तय कर दी लिमिट, हो रही ऑनलाइन मॉनिटरिंग

Petrol Pump Monitoring: मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अब 5 हजार से ज्यादा का पेट्रोल और 10 हजार रुपए से ज्यादा का डीजल बेचने पर तेल कंपनियों को जानकारी देना अनिवार्य है।
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कॉन्सेप्ट इमेज (फोटो सोर्स- नवभारत)
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MP Petrol Diesel News: मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और सप्लाई व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर निगरानी और सख्त कर दी है। अब अगर किसी ग्राहक को एक बार में 5 हजार रुपए से अधिक का पेट्रोल या 10 हजार रुपए से ज्यादा का डीजल दिया जाता है, तो इसकी पूरी जानकारी पंप संचालकों को देनी होगी कि ईंधन किसे और किस उद्देश्य से दिया गया है?

इसके साथ ही कंपनियों ने बल्क बिक्री पर भी नजर बढ़ा दी है और तय सीमा से अधिक बिक्री होने पर पंप संचालकों से जवाब मांगा जा रहा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित पंप के नोजल बंद किए जाने तक की कार्रवाई हो सकती है।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग से बढ़ी सख्ती

तेल कंपनियों ने अब बिक्री की पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ दिया है। अब हर पेट्रोल पंप से कितनी मात्रा में पेट्रोल और डीजल बिक रहा है, इसकी जानकारी सीधे कंपनियों तक पहुंच रही है। खासकर बड़े बिल और बल्क सप्लाई वाले मामलों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

पेट्रोल-डीजल की शॉर्टेज नहीं

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड औ भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सहित तीनों सरकारी तेल कंपनियों ने साफ किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। कंपनियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर अचानक मांग बढ़ने से अस्थायी स्थिति बनती है, जिसे शॉर्टेज नहीं माना जा सकता।

क्या है नया नियम?

  • 5,000 रुपए से अधिक पेट्रोल पर जानकारी अनिवार्य
  • 10,000 रुपए से अधिक डीजल पर रिपोर्टिंग जरूरी
  • बल्क और इंडस्ट्रियल सप्लाई पर सख्त निगरानी
  • हर ट्रांजैक्शन की ऑनलाइन मॉनिटरिंग
  • नियम तोड़ने पर पंप पर कार्रवाई संभव

पंप संचालकों में नाराजगी

मप्र पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर अलग-अलग सीमा तय कर दी है। उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल 10 हजार रुपए और बीपीसीएल 19 हजार रुपए से अधिक डीजल वितरण पर विशेष निगरानी रख रही है। पंप संचालकों का कहना है कि कई बड़े वाहनों और टैंकरों में अधिक डीजल भरना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अब हर बड़े ट्रांजैक्शन पर पूछताछ की जा रही है, जिससे परेशानी बढ़ गई है।

क्रेडिट सिस्टम बंद होने से बढ़ी दिक्कत

पंप संचालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि पहले तेल कंपनियां क्रेडिट सिस्टम पर सप्लाई देती थीं, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी गई है। अब पहले भुगतान और इंडेंट दर्ज करने के बाद ही टैंकर भेजा जा रहा है, जिससे कई जगह सप्लाई प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान न होने पर अगले दिन टैंकर नहीं मिलता, जिससे कई बार पेट्रोल पंप अस्थायी रूप से खाली भी हो जाते हैं।

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