EXCLUSIVE: 'जल्द होगा सुधार...', इंदौर के ‘अदृश्य’ अस्पताल पर क्या बोले MP के डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ला

Rajendra Shukla Interview: इंदौर के खजराना में बिना बने ही फाइलों में चल रहा था 100 बेड का अस्पताल, 87 पदों पर होती रही नियुक्तियां, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने दिए जांच के आदेश।
Deputy CM Rajendra Shukla assures action on Indore's alleged invisible hospital issue
राजेंद्र शुक्ला (सोर्स- नवभारत लाइव)
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Deputy CM Rajendra Shukla Exclusive Interview: मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला इंदौर से सामने आया है। खजराना क्षेत्र के लिए वर्ष 2020 में 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल की मंजूरी दी गई थी, ताकि क्षेत्र की बढ़ती आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

मंजूरी मिलने के करीब छह साल बाद भी अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो सका। न तो अस्पताल की इमारत बनी और न ही मरीजों के लिए कोई स्वास्थ्य सेवा शुरू हो पाई। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासनिक रिकॉर्ड में लगातार मौजूद रहा, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

भवन नहीं बना, फिर भी 87 पद हुए स्वीकृत और होती रही पोस्टिंग

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं होने के बावजूद उसके लिए 87 पद स्वीकृत कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि इन स्वीकृत पदों के आधार पर कर्मचारियों की ट्रांसफर और पदस्थापन की प्रक्रिया भी लगातार चलती रही। यानी जिस अस्पताल का अस्तित्व केवल सरकारी फाइलों तक सीमित था, उसके लिए स्टाफ की नियुक्ति और प्रशासनिक कार्रवाई होती रही। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्थागत खामियां सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

सरकार ने माना मामला, राजेंद्र शुक्ला ने सुधार का दिया भरोसा

इस पूरे मामले पर उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने नवभारत से बातचीत के दौरान यह कहा कि अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि सरकार ने पूरे मामले का संज्ञान ले लिया है और इसकी समीक्षा की जा रही है। उनके अनुसार, जहां भी प्रशासनिक स्तर पर कमियां सामने आएंगी, वहां आवश्यक सुधार किए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सभी लंबित परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की जा रही है, जिससे आम जनता को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

जमीन नहीं मिलने से अटका अस्पताल का निर्माण

जानकारी के अनुसार, 23 जून 2020 को खजराना क्षेत्र में 100 बेड के सिविल अस्पताल को औपचारिक मंजूरी दी गई थी। हालांकि, अस्पताल के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई। इसी वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। बावजूद इसके, अस्पताल को प्रशासनिक रूप से सक्रिय मानते हुए उससे जुड़े पद स्वीकृत कर दिए गए। अब यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की योजना निर्माण और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर बहस तेज हो गई है।

https://youtu.be/MeR-fpRB6IY?si=UmmSMkVFeZGiDxK3

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