विश्व समाजितक न्याय दिवस (सौ. फ्रीपिक)
International Social Justice Day: हर साल 20 फरवरी को दुनिया भर में विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य गरीबी, बेरोजगारी और भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म कर एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करना है। साल 2026 में यह दिन डिजिटल क्रांति के बीच हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित है।
इतिहास और शुरुआत विश्व सामाजिक न्याय दिवस की नींव साल 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा रखी गई थी जिसके बाद 2009 से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा। यह दिन हमें याद दिलाता है कि शांति और सुरक्षा तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग को समान अवसर और अधिकार मिलें।
वर्ष 2026 में विश्व सामाजिक न्याय दिवस का केंद्र बिंदु सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के प्रति नवीकृत प्रतिबद्धता (Renewed Commitment to Social Justice and Social Development) है। यह विषय हाल ही में संपन्न हुए दूसरे विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन और दोहा राजनीतिक घोषणा के परिणामों से प्रेरित है।
वैश्विक नेताओं ने 1995 की कोपेनहेगन घोषणा के सिद्धांतों को फिर से दोहराया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि गरीबी को जड़ से खत्म करना, सम्मानजनक रोजगार के अवसर पैदा करना और समाज के हर तबके को मुख्यधारा से जोड़ना ही वास्तविक विकास के स्तंभ हैं।
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इस बार का एजेंडा केवल वादों तक सीमित नहीं है। यह थीम मांग करती है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति को वास्तविक परिणामों में बदला जाए।
अब सामाजिक न्याय को केवल एक नैतिक मूल्य के रूप में नहीं बल्कि देश की आर्थिक, औद्योगिक, डिजिटल और जलवायु नीतियों के अनिवार्य हिस्से के रूप में देखा जाएगा। लक्ष्य यह है कि तकनीक से लेकर पर्यावरण तक हर नीति में आम आदमी के हितों और सामाजिक समानता को प्राथमिकता दी जाए।
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. एआई)
आज भी दुनिया के कई हिस्सों में जाति, लिंग, धर्म और आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव आम है। सामाजिक न्याय का अर्थ केवल कानूनी न्याय नहीं बल्कि समाज के संसाधनों का समान वितरण भी है।
मौजूदा वैश्विक हालातों में बढ़ती बेरोजगारी और जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा असर समाज के गरीब तबके पर पड़ता है। ऐसे में सरकारों के साथ-साथ नागरिक समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे समावेशी नीतियों को बढ़ावा दें।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने जहां लोगों को आवाज दी है वहीं गलत सूचनाओं और डेटा सुरक्षा जैसे खतरों ने नए सवाल भी खड़े किए हैं। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि प्रगति वही है जिसमें कोई भी पीछे न छूटे।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस केवल एक कैलेंडर तिथि नहीं बल्कि एक निरंतर चलने वाला आंदोलन है। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस नहीं करता तब तक न्याय की परिभाषा अधूरी है। आज के दिन हम एक ऐसी दुनिया बनाने का संकल्प लें जहां न्याय केवल किताबों में नहीं बल्कि हर इंसान के जीवन में दिखे।