World Crocodile Day: पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं मगरमच्छ, क्यों जरूरी है इनका संरक्षण
Crocodile Conservation: मगरमच्छ भी हमारी पारिस्थितिकी तंत्र यानी इको सिस्टम और नदियों-झीलों के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते है। आइए जानते हैं मगरमच्छ से जुड़ी हर जानकारी।
- Written By: रीता राय सागर
मगरमच्छ संरक्षण (फोटो.एआई)
World Crocodile Day 2026: हर साल 17 जून को विश्व मगरमच्छ दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में मगरमच्छों की विभिन्न प्रजातियों और उनके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। इनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
हालांकि मगरमच्छ को अक्सर खतरनाक जीव माना जाता है, लेकिन यह हमारे इको सिस्टम का बेहद अहम हिस्सा है। नदियों, झीलों और दलदली क्षेत्रों के संतुलन को बनाए रखने में इनकी अहम भूमिका होती है।
क्यों मनाया जाता है विश्व मगरमच्छ दिवस?
विश्व मगरमच्छ दिवस की शुरुआत लोगों को यह समझाने के लिए की गई थी कि मगरमच्छ केवल एक शिकार करने वाला जीव नहीं, बल्कि जैव विविधता का महत्वपूर्ण अंग हैं। दुनिया के कई हिस्सों में शिकार, अवैध तस्करी, प्रदूषण और प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण मगरमच्छ की कई प्रजातियां खतरे में हैं।
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इस अवसर पर वन विभाग, वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्थाएं और पर्यावरण से जुड़े संगठन लोगों को मगरमच्छ के संरक्षण और उनके महत्व के बारे में जागरूक करते हैं।
भारत में मुख्य रूप से तीन प्रकार के मगरमच्छ पाए जाते हैं-
- मगर या मगरी
- घड़ियाल
- खारे पानी का मगरमच्छ
इनमें से घड़ियाल की प्रजाति सबसे अधिक संकटग्रस्त श्रेणी में गिनी जाती है, जबकि मगर देश के कई राज्यों की नदियों और जलाशयों में पाए जाते हैं। ओडिशा भारत का एकमात्र राज्य है, जहां देश की तीनों मूल मगरमच्छ प्रजातियां- घड़ियाल मगर या मगरमच्छ और खारे पानी का मगरमच्छ प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं।
गुजरात का वडोदरा क्यों है खास?
गुजरात का वडोदरा शहर मगरमच्छों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां बहने वाली विश्वामित्री नदी में बड़ी संख्या में मगरमच्छ पाए जाते हैं। बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने पर कई बार ये मगरमच्छ नदी से निकलकर रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं, जिससे वन विभाग को उन्हें सुरक्षित पकड़कर वापस नदी में छोड़ना पड़ता है।
कैसे मनाया जाता है यह दिवस?
विश्व मगरमच्छ दिवस पर विभिन्न देशों में जागरूकता अभियान, प्रदर्शनी, वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम, स्कूलों में प्रतियोगिताएं और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। विशेषज्ञ लोगों को बताते हैं कि मगरमच्छों से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना क्यों जरूरी है।
क्यों जरूरी है मगरमच्छों का संरक्षण?
एक्सपर्ट मानते हैं कि मगरमच्छ जलाशयों के इकोसिस्टम को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इनकी संख्या लगातार घटती है, तो जलीय जैव विविधता और प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए इनका संरक्षण केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी आवश्यक माना जाता है।
मगरमच्छों की खास बातें
- मगरमच्छ दुनिया के सबसे बड़े जीवित रेपटाइल्स हैं।
- ये मुख्य रूप से मीठे पानी के दलदली क्षेत्रों, नदियों और झीलों में रहते हैं, जबकि खारे पानी का मगरमच्छ समुद्री और तटीय क्षेत्रों में भी पाया जाता है।
- मगरमच्छ निशाचर होते हैं, यानी ये रात के समय अधिक सक्रिय रहते हैं।
- मगरमच्छ के के शरीर का तापमान आसपास के वातावरण के अनुसार बदलता रहता है।
मगरमच्छों के सामने प्रमुख खतरे
- प्राकृतिक आवास का नष्ट होना
- अंडों का शिकार और नष्ट होना
- अवैध शिकार
- बांधों का निर्माण
- नदियों में अत्यधिक रेत खनन
भारत में मगरमच्छों की आबादी
- भारत में दुनिया के लगभग 80% जंगली घड़ियाल पाए जाते हैं। वर्तमान में देश में इनकी संख्या लगभग 3,000 है।
- घड़ियाल मुख्य रूप से नेशनल चंबल अभयारण्य, कटरनिया घाट वन्यजीव अभयारण्य और सोन घड़ियाल अभयारण्य में पाए जाते हैं।
- वहीं, खारे पानी के मगरमच्छों की संख्या बढ़कर करीब 2,500 हो चुकी है। ये मुख्य रूप से भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और सुंदरबन क्षेत्र में पाए जाते हैं।
