

International Food Safety Day: हर साल 7 जून को वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को फूड्स की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। हर साल खाने की वजह से होने वाली बीमरियों के कई मामले सामने आते हैं। इसलिए खानपान की चीजों की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है, ताकि आप सेहतमंद रहें।
थोड़ी सी लापरवाही भी हमारे खाने को तेजी से खराब कर सकती है, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। खराब खाना और पानी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में गर्मियों में फूड पॉइजनिंग से बचने और अपने साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को हेल्दी रखने के लिए खानपान से जुड़ी सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी है।
साल्मोनेला, ई-कोलाई, लिस्टेरिया जैसे जीवाणु, नोरोवायरस और हेपेटाइटिस-ए जैसे विषाणु तथा विभिन्न परजीवी संक्रमण भोजन को विषाक्त बना सकते हैं।
कीटनाशक, उर्वरक, भारी धातुओं, औद्योगिक प्रदूषक तथा कृत्रिम रसायनों की अत्यधिक उपस्थिति मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।
खाद्य मिलावट, दूषित जल, अस्वच्छ भंडारण, अनुचित परिवहन और प्रोसेसिंग में लापरवाही खाद्य सुरक्षा को कमजोर बनाते हैं। ये सभी कारक मानव शरीर में अल्पकालिक संक्रमण से लेकर कैंसर, किडनी रोग, गुर्दा विकार और तंत्रिका तंत्र संबंधी गंभीर समस्याओं तक को जन्म दे सकते हैं।
भारत विश्व के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में से एक है। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और आधुनिक कृषि नीतियों के कारण देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं की मदद से करोड़ों नागरिकों तक खाद्यान्न पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा के समक्ष अनेक चुनौतियां मौजूद हैं। भंडारण सुविधाओं की कमी, कोल्ड स्टोरेज की कमी, फूड वेस्टेज, मिलावट, स्वच्छता संबंधी समस्याएं तथा जागरूकता की कमी आज भी गंभीर चिंता का विषय हैं।
भारत में खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 लागू किया गया। इसके अंतर्गत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की स्थापना की गई। FSSAI खाद्य मानकों का निर्धारण, लाइसेंसिंग, निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण, लेब नेटवर्क के विकास और उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करती है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता संरक्षण कानून (Consumer Protection Law, 2019) भी नागरिकों को सुरक्षित भोजन प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करते हैं। CPL का काम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने, धोखाधड़ी रोकने और भ्रामक विज्ञापनों पर लगाम लगाने के लिए प्रभावी कानून बनाना है।
कच्ची सब्जियों या फलों को भी लंबे समय तक स्टोर करने के लिए आप इन्हें फ्रीज में रख सकते हैं। फ्रीज में रखने से पहले इन्हें पानी से अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद इन्हें अच्छे से सुखाकर, साफ कपड़ों से पोंछ कर ही स्टोर करें, लेकिन अन्य फलों के साथ केले को कभी भी फ्रिज में न रखें।
कई लोग अंडे को फ्रिज में नहीं रखते हैं। जिससे ये खराब हो जाते हैं। कच्चे अंडे को फ्रेश रखने के लिए आप इन्हें फ्रिज में रख सकते हैं, लेकिन उबले अंडे को फ्रिज में स्टोर न करें, इसे तुरंत ही खा लें। उबले अंडों को प्रिज में रखने से ये विषाक्त हो जाते हैं।
गर्मियों में दूध बहुत जल्दी खराब हो जाता है। आप इसे सुरक्षित करने के लिए सबसे पहले अच्छी तरह उबाल लें। जब यह ठंडा हो जाए, तो इसे फ्रिज में रखें। ऐसा करने से आप इसे किसी भी मौसम में खासकर गर्मियों में खराब होने से बचा सकते हैं।
चाहे कच्चा खाना हो या पका खाना, इन्हें सुरक्षित करने के लिए फ्रिज में रखना जरूरी है। हालांकि पके हुए खाने को एयर टाइट कंटेनर में स्टोर कर सकते हैं। नॉनवेज फूड्स यानी कच्चे मांस-मछली को सुरक्षित करने के लिए फ्रीजर में रखना चहिए। संभव हो, तो इसे तुरंत पका कर तुरंत खा लेना चाहिए।
अक्सर लोग जैम और सॉस को बाहर ही रखते हैं। ये चीजें बाहर रखने से बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं। आप इन्हें फ्रीज में रखकर कई दिनों तक इस्तेमाल कर सकते हैं।
कई लोग आलू, प्याज और लहसुन को लंबे समय तक स्टोर करने के लिए फ्रिज में रख देते हैं। ऐसा करने से ये जल्दी खराब हो जाते हैं। ये फ्रिज में बदबू का कारण भी बन सकते हैं। आप इन्हें स्टोर करने के लिए अलग-अलग टोकरी में बाहर रखें। खुली हवा में रहने से ये ज्यादा समय तक टिकेंगे।
फ्रिज में मिठाइयां स्टोर करना भारतीय घरों में बेहद आम बात है। इसके लिए एयर टाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें। लेकिन इन्हें बहुत लंब समय तक स्टोर न करें। इससे मिठाइयों का स्वाद फीका पड़ने लगता है और सेहत के लिए भी नुकसानदायक होती हैं, क्यों कि ज्यादातर मिठाइयां दूध या दूध से बनी चीजों जैसे- मावा या छेना से बनाया जाता है।