भावनात्मक दूरी को दर्शाता कपल (सौ. फ्रीपिक)
Relationship Mistakes: आजकल के समय में प्यार का मतलब नजर रखना बनता जा रहा है। जहां 24 घंटे की चैटिंग और हर पर की अपडेट रिश्तों में गहराई के बजाय घुटन पैदा कर रही है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे फेफड़ों को सांस लेने के लिए हवा चाहिए वैसे ही रिश्तों को जिंदा रहने के लिए दूरी जरूरी है।
कई बार हमें लगता है कि हम जितना ज्यादा समय पार्टनर के साथ बिताएंगे उतना ही प्यार गहरा होगा। लेकिन हकीकत में इसका उलटा होता है। आज के समय में रिश्तों के टूटने या उनमें कड़वाहट आने की सबसे बड़ी वजह पर्सनल स्पेस की कमी है। जब प्यार कंट्रोल में बदल जाता है तो वहां से रिश्ते का अंत शुरू होने लगता है।
हर वक्त साथ रहने की चाहत धीरे-धीरे इंसान को अपनी व्यक्तिगत पहचान, शौक और दोस्तों से दूर कर देती है। मोबाइल, कॉल और चैट्स ने पार्टनर को एक-दूसरे की निगरानी करने पर मजबूर कर दिया है। जब कोई चीज हमेशा उपलब्ध होती है तो धीरे-धीरे उसकी कद्र कम होने लगती है। प्यार अब भावनाओं का मिलन नहीं, बल्कि एक ‘आदत‘ बन जाता है, जहाँ रोमांच खत्म होने लगता है और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है।
रिश्ते में स्पेस खत्म होता है तो शक अपनी जगह बना लेता है। कहां हो? किसके साथ हो? फोन क्यों नहीं उठाया? ये सवाल प्यार नहीं बल्कि असुरक्षा की निशानी हैं। जब दो लोग हर समय एक-दूसरे के मानसिक दायरे में होते हैं तो छोटी-छोटी बातें बड़ी बहस का रूप ले लेती हैं। यहीं से रिश्ते जहरीले होने लगते हैं।
झगड़ते हुए कपल (सौ. फ्रीपिक)
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मनोविज्ञान कहता है कि थोड़ी सी दूरी प्यार को कमजोर नहीं बल्कि उसे तरोताजा करती है। इसके कई फायदे हैं।
सम्मान में बढ़ोतरी: जब आप कुछ समय अकेले या दोस्तों के साथ बिताते हैं, तो पार्टनर के लिए आपके मन में सम्मान और उसकी अहमियत बढ़ती है।
यादों का अहसास: दूरी ही साथी की कमी का अहसास कराती है और दोबारा मिलने की उत्सुकता पैदा करती है।
बेहतर संवाद: दूर रहने के बाद जब आप मिलते हैं तो आपके पास साझा करने के लिए नई बातें और अनुभव होते हैं जिससे बातचीत में गहराई आती है।
एक मजबूत रिश्ते के लिए जरूरी है कि आप खुद को न खोएं। अपनी रुचियों को जिंदा रखें और पार्टनर को भी वह आजादी दें। याद रखिए हाथ में रेत को जितना कसकर पकड़ेंगे वह उतनी ही जल्दी हाथ से फिसल जाएगी। रिश्तों के साथ भी ऐसा ही है।