होली खेलते हुए बच्चे (सौ. फ्रीपिक)
Safe Holi 2026: आज यानी 4 मार्च को रंगों का त्योहार होली पूरे देश में उल्लास के साथ मनाया जाएगा। लेकिन बदलते मौसम और बाजार में मिलने वाले जहरीले केमिकल युक्त रंगों के बीच अपनी सेहत को बचाना एक बड़ी चुनौती है। आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर कुछ बेहद आसान गाइडलाइन्स जारी की हैं ताकि आपकी होली फीकी न पड़े।
आयुर्वेद के अनुसार रंग खेलने निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले पूरे शरीर और बालों पर नारियल या तिल के तेल की मालिश करें। यह तेल आपकी त्वचा पर एक अदृश्य प्रोटेक्टिव लेयर बना देता है जिससे हानिकारक केमिकल रोमछिद्रों के अंदर नहीं जा पाते। इससे होली के बाद रंग छुड़ाना भी बेहद आसान हो जाता है और स्किन ड्राई नहीं होती।
बाजारू सिंथेटिक रंगों में लेड और क्रोमियम जैसे खतरनाक तत्व होते हैं जो आंखों में जलन और स्किन एलर्जी पैदा करते हैं। इसके बजाय घर में मौजूद बेसन, हल्दी, गुलाब की पंखुड़ियां या टेसू के फूलों का इस्तेमाल करें। हल्दी के एंटी-बैक्टीरियल गुण आपकी त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं और उसे प्राकृतिक निखार देते हैं।
होली पर अक्सर हम भारी, तला-भुना और ज्यादा मीठा खा लेते हैं जिससे अपच और सुस्ती महसूस होती है। आयुर्वेद सलाह देता है कि इस दिन हल्का और सात्विक भोजन लें। ज्यादा मलाईदार चीजों के बजाय छाछ, पुदीने का शरबत या नारियल पानी जैसे डिटॉक्स ड्रिंक्स का सेवन करें। यह न केवल शरीर को ठंडा रखेंगे बल्कि पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखेंगे।
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रंग खेलने और भागदौड़ के दौरान शरीर से काफी पसीना निकलता है जिससे डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो सकती है। डिहाइड्रेशन से त्वचा रूखी हो जाती है और सिरदर्द की समस्या हो सकती है। दिन भर अंतराल पर सादा पानी, नींबू-पानी या हर्बल जूस पीते रहें। यह शरीर से रंगों के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है।
आंखें सबसे संवेदनशील अंग हैं। होली खेलते समय धूप का चश्मा पहनना एक बेहतरीन बचाव है। यदि गलती से रंग आंखों में चला जाए तो उसे रगड़ने के बजाय तुरंत ठंडे साफ पानी या गुलाब जल के छींटे मारें। खेल खत्म होने के तुरंत बाद सादे पानी से चेहरा धोएं और हर्बल उबटन का प्रयोग करें।
मिलावटी मावा और एक्सपायरी डेट वाली मिठाइयों से बचें। केवल भरोसेमंद दुकानों से ही खाद्य सामग्री लें ताकि फूड पॉइजनिंग का खतरा न रहे।