साल 2025 में कब हैं मकर संक्रांति, इस दिन क्यों खाई जाती है खिचड़ी
साल के पहले महीने में मकर संक्रांति के रूप में त्योहार मनाया जाता है। इस संक्रांति को पौष संक्रांति के नाम से भी जाने जाते है। साल की कुल 12 संक्रांति में से एक यह संक्रांति होती है।
- Written By: दीपिका पाल
मकर संक्रांति 2025 (सौ. डिजाइन फोटो)
Makar Sankranti 2025: हिंदू धर्म में हर व्रत और त्योहार का एक विशेष स्थान होता है जिसे आध्यात्मिक लोग श्रद्धा के साथ मनाते है। आने वाले साल 2025 को लेकर जहां पर कुछ दिन ही शेष बचे हैं तो वहीं पर जनवरी 2025 की शुरुआत होगी। साल के पहले महीने में मकर संक्रांति के रूप में त्योहार मनाया जाता है। इस संक्रांति को पौष संक्रांति के नाम से भी जाने जाते है। साल की कुल 12 संक्रांति में से एक यह संक्रांति होती है। इस दिन पतंग उड़ाने से लेकर कई प्रकार की परंपराएं प्रचलित होती है इसका पालन करना जरूरी है। इसमें ही सबसे खास एक खिचड़ी बनाने की परंपरा सबसे खास होती है आखिर क्या है इसके पीछे की वजह।
जानिए क्या है मकर संक्रांति का मुहूर्त
यहां पर द्रिकपंचाग के अनुसार, मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त बताया गया है। हर साल की तरह 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी इसका शुभ मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से शाम 5:46 बजे तक है।
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जानिए क्यों बनाते हैं खिचड़ी
सबसे खास मकर संक्रांति के दिन मुख्य पकवान में खिचड़ी बनाई जाती है इसे लेकर मान्यताएं प्रचलित है। आयु्र्वेद के अनुसार खिचड़ी सुपाच्य भोजन है, जो सेहत के लिए औषधि की तरह काम करता है। इसकी धार्मिक मान्यता समझें तो, चावल चंद्रमा का, काली उड़द शनि, हल्दी गुरु और नमक शुक्र का प्रतीक है. वहीं, हरी सब्जियां बुध का प्रतीक मानी जाती हैं। यहां पर अगर कोई भी मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाते हैं तो उसके सभी ग्रह मजबूत होते है। यह भी मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी के सेवन से आप पूरे साल आरोग्य भी रहते हैं।
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मकर संक्रांति का महत्व
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का अच्छा खासा महत्व होता है जहां पर जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में जाता है और मकर राशि में प्रवेश करता है, तो यह सर्दियों के अंत को दर्शाता है, जिससे मकर संक्रांति न केवल धार्मिक रूप से बल्कि मौसमी रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस दिन के बाद से दिन तिल की तरह बढ़ने लगते है।
