
टेसू के फूल के पानी से क्यों खेलते है होली (सौ.सोशल मीडिया)
Tesu Flower Holi: होली का त्योहार आने में कुछ दिन ही बाकी है जो इस साल 14 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन को लेकर लोग तैयारियां शुरु कर देते है तो वहीं पर ब्रज में इन दिनों रंगोत्सव मनाया जा रहा है। होली पर मथुरा और कई जगहों पर केमिकल रंगों से अलग टेसू के फूलों से बनें रंगों से होली खेली जाती है। पूरे ब्रज में विभिन्न तरीकों से होली को सेलिब्रेट किया जाता है। इसमें कहीं फूल, लड्डू, लठ्ठ मार और चप्पल मार होली खेली जाती है। यहां पर टेसू के फूलों वाले रंग से होली खेलना जितना सुरक्षित माना जाता है उतना ही इसका धार्मिक महत्व भी होता है।
आपको बताते चलें कि, टेसू के फूलों से तैयार रंग को अगर हम चेहरे पर लगाते है तो नुकसान नहीं पहुंचता है इसका कारण है कि, यह बेहद नेचुरल होते है। टेसू के फूलों से तैयार रंग का इस्तेमाल टेसू के फूलों से बने रंग के कारण होली खेलना न केवल रंगीन होता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित है। बता दें कि पलाश के फूलों का रंग गहरे लाल और नारंगी मिक्स रंग में होता है। यह नेचुरल रंग आमतौर पर गुलाल और रासायनिक रंगों की तुलना में बहुत अधिक चमकदार और सुंदर दिखाई देता है।
बताया जाता है कि, पुराने समय में केमिकल वाले रंग नहीं मिलते थे तो फूलों के जरिए रंग बनाया जाता था। यह प्रकृति से तैयार रंग टेसू मुख्यता प्रकृति में पाई जाने वाली चीजों से तैयार किया जाता था। इस रंग को आज भी इस्तेमाल में लिया जाता है।
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आपको बताते चलें कि, हिंदू धर्म में टेसू के फूल का महत्व होता है जिस फूल को भगवान शिव को अर्पित करते है। यहां पर शिव मंदिरों में अक्सर इन फूलों का अर्पण किया जाता है और यह पूजा के दौरान भक्तों द्वारा शुभ माना जाता है। होली के दिन, यह फूलों का रंग बुराई पर अच्छाई की जीत और समृद्धि की प्रतीक को दर्शाता है। टेसू के फूल के अलावा भी कई फूलों से भी रंग तैयार किए जाते है।






