
जनजातीय गौरव दिवस (सौ.सोशल मीडिया)
Janjatiya Gaurav Divas: देशभर में 15 नवंबर का दिन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को समर्पित होता है जिसे जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर जाना जाता है। जनजातियों के बीच सबसे प्रसिद्ध औऱ देवता बिरसा मुंडा को समर्पित दिन होता है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव, वीरता तथा भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने में आदिवासियों के प्रयासों को मान्यता देने के लिए हर वर्ष बिरसा मुंडा जयंती 15 नवंबर को मनाई जाती है। भगवान बिरसा मुंडा को समर्पित इस दिन पर जनजातीय समुदाय के लोग बड़ा आयोजन करते है।
हर साल 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 3 साल पहले यानि साल 2021 की मानी जाती है जिसकी स्वीकृति केंद्र की मोदी सरकार ने दी थी। इस साल 2021 के बाद से अब तक इस तारीख पर जनजातीय गौरव दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने के पीछे का उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान करने से है।
इस दिन को खास तौर पर जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर, उनकी परंपराओं और उनके गौरवशाली इतिहास को समझने और सम्मानित करने के लिए मनाने की परंपरा होती है। इस जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर जनजातीय समाज के लोगों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। यह दिवस जनजातीय समाज के संघर्षों और उनके योगदान को याद करने का है।
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यहां पर जनजातीय गौरव दिवस को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाता है। उनका जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में एक साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों से भरा था और उन्हें बाल्यावस्था से ही आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। जनजातीय समुदाय पर हो रहे अत्याचार औऱ शोषण के विरूद्ध आवाज उठाने वाले बिरसा मुंडा ही रहे। अंग्रेजों के जमाने में जनजातीय समुदाय के साथ लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण को लेकर अत्याचार का सामना किया था।
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आपको बताते चलें कि, बिरसा मुंडा का अंतर्मन जनजाति समुदाय पर इन सभी अत्याचार और शोषण से भर गया था। जिसके खिलाफ आवाज उठाते हुए बिरसा मुंडा ने उलगुलान जनजातीय विद्रोह की शुरुआत की। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भूमि नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारम्परिक जीवनशैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाना था।
बिरसा मुंडा केवल स्वतंत्रता सैनानी नहीं बल्कि उन्होंने जनजातीय समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे अंध-विश्वास, जाति-भेद, नशाखोरी, जातीय संघर्ष और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाई थी इसके अलावा अनुयायियों को शिक्षा का महत्व समझाने के साथ ही एकता के साथ रहने का संदेश भी दिया।






