मैसेज भेजने से पहले क्या आपको भी होती है घबराहट? जानें क्या है टेक्स्टिंग एंग्जायटी और इससे बचने के उपाय

Texting Anxiety Symptoms: कई लोगों को मैसेज भेजने से पहले घबराहट या ओवरथिंकिंग महसूस होती है, जिसे टेक्स्टिंग एंग्जायटी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति बार-बार मैसेज पढ़ता है गलत समझे जाने का डर रहता है।
Texting Anxiety Symptoms
मोबाइल पर मैसेज टाइप करते समय चिंतित व्यक्ति (सौ. एआई)
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Mental Health Tips: आज के डिजिटल युग में मैसेजिंग हमारी दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी को मैसेज भेजने या रिप्लाई करने से पहले आपको अचानक तनाव या घबराहट महसूस होने लगती है। यदि आपका जवाब हां है तो आप टेक्स्टिंग एंग्जायटी नामक मानसिक स्थिति का सामना कर रहे हो सकते हैं। यह समस्या आज के दौर में युवाओं और पेशेवरों के बीच तेजी से बढ़ रही है।

क्या है टेक्स्टिंग एंग्जायटी

एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति मोबाइल पर संदेश भेजने, पढ़ने या उनका जवाब देने के दौरान अत्यधिक तनाव, डर और ओवरथिंकिंग का अनुभव करता है। इस स्थिति में व्यक्ति अक्सर एक छोटा सा संदेश लिखने में भी काफी समय लेता है और हर शब्द को लेकर संशय में रहता है।

प्रमुख लक्षण और संकेत

टेक्स्टिंग एंग्जायटी से पीड़ित व्यक्ति में कुछ खास व्यवहारिक और शारीरिक लक्षण देखे जा सकते हैं। इसमें व्यक्ति बार-बार मैसेज टाइप करता है और फिर उसे डिलीट कर देता है। इसके अलावा सामने वाले का सीन या लास्ट सीन स्टेटस देखकर परेशान होना, रिप्लाई आने में देरी होने पर बेचैनी महसूस करना और मैसेज भेजते समय दिल की धड़कन तेज हो जाना इसके स्पष्ट संकेत हैं। पीड़ित व्यक्ति अक्सर छोटे-छोटे संदेशों के अर्थ निकालने में भी बहुत ज्यादा सोचने लगता है।

घबराहट के पीछे के मुख्य कारण

टेक्स्टिंग एंग्जायटी के पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं।

  • ओवरथिंकिंग: संदेश पढ़ते या लिखते समय हर शब्द के गहरे मायने खोजने की कोशिश तनाव बढ़ा देती है।
  • रिजेक्शन का डर: लोग अक्सर यह सोचकर डरते हैं कि उनके मैसेज पर सामने वाला क्या सोचेगा या उसका जवाब नकारात्मक होगा।
  • तुरंत जवाब देने का दबाव: आजकल के 'इंस्टेंट रिप्लाई' के कल्चर ने यह दबाव बना दिया है कि मैसेज मिलते ही जवाब देना जरूरी है, जिससे स्ट्रेस बढ़ता है।
  • सोशल मीडिया का प्रभाव: दूसरों की ऑनलाइन एक्टिविटी देखकर खुद से तुलना करना भी मन-मस्तिष्क पर बुरा असर डालता है।

कैसे पाएं छुटकारा

इस समस्या को कुछ आसान उपायों और जीवनशैली में बदलाव के जरिए प्रबंधित किया जा सकता है। सबसे पहले अपने संदेशों को परफेक्ट बनाने की कोशिश छोड़ दें हर मैसेज का त्रुटिहीन होना जरूरी नहीं है। जो कहना है उसे सीधे और सरल शब्दों में लिखने का प्रयास करें।

इसके अलावा अपने फोन के नोटिफिकेशन को कंट्रोल करना एक प्रभावी कदम हो सकता है। बार-बार फोन चेक करने की आदत छोड़ें और नोटिफिकेशन टोन बंद कर दें। जवाब देने के लिए खुद को समय दें और यह समझें कि तुरंत रिप्लाई देना अनिवार्य नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर डिजिटल ब्रेक लें और फोन से दूरी बनाएं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी रियल लाइफ बातचीत बढ़ाएं क्योंकि आमने-सामने की बात से आत्मविश्वास बढ़ता है और एंग्जायटी कम होती है।

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