
File Photo
-सीमा कुमारी
सनातन हिन्दू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है, और इस महीने में आने वाले हर व्रत और त्योहार भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हीं में से एक व्रत ‘मौनी अमावस्या’ या ‘माघी अमावस्या’ भी है।
हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को परम पुण्यदायक ‘मौनी अमावस्या’ का यह महत्वपूर्ण पर्व पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष ‘माघी अमावस्या’ का पवित्र स्नान पर्व माघ कृष्ण पक्ष अमावस्या 1 फरवरी मंगलवार को होगा।
इस दिन प्रयागराज के पावन संगम, अर्थात त्रिवेणी एवं काशी के चंद्रावती बलुआ के पश्चिम वाहिनी गंगा में मौन रहकर स्नान करने से गंगा स्नान का महापुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और ब्राह्मणों को भेंट दक्षिणा के साथ ‘सीधा’ दान (अनाज दान) करने से जातक के परिवार में सुख समृद्धि तथा पितरों की असीम कृपा सदैव बनी रहती है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित अमर डब्बावाला के मुताबिक, 1 फरवरी को मंगलवार के दिन अमावस्या तिथि, नागकरण, व्यतिपात योग तथा मकर राशि का चंद्रमा होने से ‘महोदय योग’ नामक योग का निर्माण हो रहा है। ‘महादेय’ का अर्थ है ‘महा उदय’। ऐसी मान्यता है कि, ‘महाेदय योग’ में तीर्थ स्नान करके पितरों के निमित्त देव, ऋषि, पितृ-तर्पण करने के उपरांत वैदिक ब्राह्मणों को दक्षिणा और सीधा दान करना चाहिए। इससे पुण्य की प्राप्ति के साथ बाधाओं का निवारण तथा आर्थिक प्रगति तथा परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी।
‘मौनी अमावस्या’ पर उज्जैन की शिप्रा नदी तथा नीलगंगा सरोवर में स्नान का महत्व है। धर्मशास्त्रीय मान्यता में नीलगंगा शिप्रा का वह स्थान है, जहां माता गंगा अपने दोषों की निवृत्ति के लिए शिप्रा में स्नान करने आई थी। ऐसे में शिप्रा गंगा से युत नीलगंगा सरोवर में स्नान करने से गंगा स्नान का पुण्य फल प्राप्त होता है।
पपण्डित डब्बावाला के अनुसार जिन लोगों के यहां अमावस्या, पूर्णिमा तथा पर्व त्योहारों पर ब्राह्मण भोजन कराने में किसी प्रकार की परेशानी हो, तो वे सीधा दान कर सकते हैं। भोजन बनाने की कच्ची सामग्री को ‘सीधा’ कहते हैं। इसमें आटा, दाल, शकर, शुद्ध घी, मसाले, शाक आदि अपनी सामर्थ अनुसार ब्राह्मण को दान करने का विधान बताया गया है। सीधा दान करने से ब्राह्मण को भोजन कराने के समान ही पुण्य प्राप्त होता है।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मौन रखना, गंगा स्नान करना और दान देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। अमावस्या के विषय में कहा गया है कि इस दिन मन, कर्म तथा वाणी के जरिए किसी के लिए अशुभ नहीं सोचना चाहिए। केवल बंद होठों से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तथा “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य देने से पापों का शमन एवं पुण्य की प्राप्ति होती है।






