चाइनीज कॉलर कब आया (सौ.सोशल मीडिया)
फैशन जगत में फैशन के कई नायाब उदाहरण देखने के लिए मिल जाते है जिसमें हर दिन कोई ना कोई स्टाइल फैशन बनते जा रहा है। आप धार्मिक आयोजन के दौरान कुर्ता को पहनते होंगे उसकी कॉलर की स्टाइल या बनावट पर कभी गौर किया है यह एक सी ना होकर अलग-अलग स्टाइल में होती है। हम बात कर रहे है चाइनीज कॉलर की जो शेरवानी, टीशर्ट में नजर आती है इसे महिलाए भी ब्लाउज या कुर्ते के स्टाइल में ले सकते है।
चीन के इस कॉलर डिजाइन स्टाइल को मंदारिन कॉलर कहते है जिसमें कॉलर छोटे होने के साथ मुड़ते नहीं है इसके साथ आप किसी तरह की टाई भी नहीं पहन सकते है। इस स्टाइल को लाने का श्रेय चीन में पहने जाने वाले पारंपरिक गाउन से जुड़ी पारंपरिक विशेषता थी। इसके साथ ही इसे पश्चिम से नाम मिला। बताया जा रहा है कि, कॉलर ने वेस्टर्न पश्चिमी वाडरोब में अपनी जगह ली है, 20वीं सदी की शुरुआत में डिजाइनरों और फैशन हाउसों में मंदारिन कॉलर को अपनाया साथ ही इसे सूट और ड्रेस से लेकर ब्लाउज और जैकेट जैसे कई पोशाकों में शामिल कर उन्हें डिफरेंट लुक दिया। यहां पर इन कॉलर की खासियत यह मानी गई है कि, यह कॉलर टाइट नहीं होते है इन्हें किसी भी कपड़े में आसानी से बनाया जाता है। यानि कैजुअल लुक देने के लिए बिना बटन के छोड़ दिया जाता है।
चाइनीज कॉलर कब आया (सौ.सोशल मीडिया)
कहते है कि, चाइनीज कॉलर एक तरह से मंदारिन कॉलर, स्टैंडिंग कॉलर, नेहरू कॉलर और बैंड या चोकर कॉलर के नाम से भी जाना जाता है. ये शर्ट या जैकेट पर छोटा खुला हुआ स्टैंड-अप कॉलर स्टाइल है. कॉलर का ये स्टाइल प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का पसंदीदा बन गया था उनकी जैकेट में यह कॉलर होता था। धीरे-धीरे इसका चलन बढ़ने लगा तो इसका नाम भारत की स्टाइल में रखा जाने लगा। इसे पूर्व भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम पर नेहरू कॉलर नाम दिया गया। इसे बंद गले का कोट के नाम से भी जाना जाता है. आजकल लोगों में ये बहुत प्रिय है. आज के समय में छोटे अनफोल्ड स्टैंड-अप कॉलर का डिजाइन बहुत कम बदला है।आप भी क्लासी लुक पाने के लिए कैजुअल शर्ट, जैकेट, शेरवानी, कुर्ता, ब्लाउज और कोट पर ये कॉलर डिजाइन बनवा सकते हैं. इससे आपको क्लासी और स्टाइलिश लुक मिल सकता है।