

Workplace Meeting Stress: क्या आप भी आपके वर्कप्लेस पर होने वाले मीटिंग से परेशान हैं? आपके काम के 8-9 घंटे बस एक मीटिंग से दूसरी मीटिंग में ही निकल जाता है? अगर दिन खत्म होने के बाद भी जरूरी काम अधूरे रह जाते हैं और आप मानसिक थकावट महसूस करते हैं, तो यह 'मीटिंग फटीग' हो सकता है।
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लगातार वर्चुअल और ऑफलाइन मीटिंग्स से कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी कम होने लगती है और वह बर्नआउट महसूस करने लगता है।
जब कोई एम्प्लॉय लगातार मीटिंग्स में शामिल होने के कारण मानसिक और शारीरिक थकान महसूस करने लगता है, तो इस परिस्थिति को मीटिंग फटीग कहते हैं। बार-बार कॉन्टेक्स्ट बदलना, लगातार स्क्रीन देखना और बिना ब्रेक के मीटिंग्स में बैठना दिमाग पर दबाव डालता है। इससे काम पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है और एकाग्रता में कमी आ जाती है।
वर्कप्लेस एक्सपर्ट्स के अनुसार, हाइब्रिड और रिमोट वर्क कल्चर के बाद मीटिंग्स की संख्या काफी बढ़ गई है। ज्यादातर मीटिंग्स ऐसी होती हैं, जिनका उद्येश्य स्पष्ट नहीं होता है। इससे कर्मचारियों के पास अपने एक्चुअल काम के ले समय नहीं बचता है और ऐसे में वर्कलोड बढञने से वर्क स्ट्रेस भी बढ़ जाता है।