होली खेलते समय आंखों में रंग जाना (सौ. एआई)
How To Protect Eyes During Holi: होली खुशियों और रंगों का त्योहार है लेकिन जरा सी लापरवाही इसे भारी बना सकती है। अक्सर रंगों में मौजूद हानिकारक केमिकल्स और शीशे के कण आंखों में जलन, इन्फेक्शन या आंखों में समस्या का कारण बन सकते हैं। ऐसे में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी बातों ध्यान रखना चाहिए।
बाजार में मिलने वाले आजकल के रंगों और गुलालों में लेड, मरकरी और कॉपर सल्फेट जैसे खतरनाक केमिकल्स होते हैं। जब ये आंखों के संपर्क में आते हैं तो न केवल जलन पैदा करते हैं बल्कि कॉर्नियल अब्रेशन का कारण भी बन सकते हैं। अगर समय रहते सही कदम न उठाए जाएं तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
जैसे ही आंखों में रंग या गुलाल जाए सबसे पहले घबराना बंद करें। आंखों को तुरंत साफ और ठंडे पानी से धोएं। कम से कम 5-10 मिनट तक पानी के छींटे मारें ताकि रंग के कण बाहर निकल जाएं।
अगर आप लेंस पहनते हैं तो रंग लगते ही उन्हें तुरंत हटा दें क्योंकि लेंस केमिकल को सोख लेते हैं और इन्फेक्शन बढ़ा सकते हैं। यदि आंखों में हल्की जलन बनी रहती है तो डॉक्टर की सलाह पर लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें।
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सबसे महत्वपूर्ण बात जो एक्सपर्ट्स बार-बार कहते हैं वह है’आंखों को न रगड़ना। जब आंखों में रंग या गुलाल जाता है तो खुजली महसूस होती है। लेकिन रगड़ने से रंग के बारीक कण आंखों की नाजुक सतह को छील सकते हैं। इसके अलावा घरेलू नुस्खे जैसे आंखों में तेल या गुलाब जल डालना भी खतरनाक हो सकता है।
बच्चों की आंखें वयस्कों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती हैं। उन्हें होली खेलने से पहले सनग्लासेज पहनाएं और उन्हें समझाएं कि वे चेहरे पर सीधे रंग न डालें। साथ ही बच्चों के चेहरे और आंखों के आसपास कोल्ड क्रीम या नारियल तेल की एक मोटी परत लगा दें ताकि रंग त्वचा और पलकों पर न चिपके।
होली का आनंद लें लेकिन सुरक्षा से समझौता न करें। यदि पानी से धोने के बाद भी लाली कम न हो धुंधला दिखाई दे या तेज दर्द हो तो बिना देरी किए नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।