

Mental Health Awareness: हर समय थकान महसूस होना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, नींद न आना या बिना किसी वजह के बेचैनी बने रहना। कई बार इन संकेतों को काम का दबाव या रोजमर्रा की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता हैं। लेकिन जब ये छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय तक बने रहें और डेली लाइफ को प्रभावित करने लगे, मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
हर साल 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इस बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करना है। साल 2026 में इस दिवस की थीम है- 'Lived experiences heard: real voices, real change', यानी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा अपना अनुभव रखने वाले लोगों की बात सुनना और उन्हें फैसलों में शामिल करना।
सबसे पहले यह बात समझनी होगी कि तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी अलग-अलग स्थितियां हैं। इनके लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं, लेकिन इनके कारण और इलाज अलग होते हैं।
अगर कई दिनों से मन उदास रहता है, निराशा महसूस होती है या पहले पसंद आने वाली चीजों में रुचि कम हो गई है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक ऐसे लक्षण बने रहना डिप्रेशन का संकेत हो सकते है।
बार-बार किसी अनहोनी की आशंका होना, छोटी बातों को लेकर बहुत ज्यादा सोचना, बेचैनी महसूस करना या चिंता पर काबू न रख पाना एंग्जायटी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
नींद न आना, बार-बार जागना या सामान्य से ज्यादा सोना, भूख कम या ज्यादा लगना और वजन में अनचाहा बदलाव मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी के साथ दिखाई दे सकते हैं।
काम में मन न लगना, छोटी-छोटी बातें भूलना, फैसले लेने में मुश्किल होना या सामान्य जिम्मेदारियां निभाना कठिन लगना भी मेंटल हेल्थ के लिए ध्यान देने योग्य बातें हैं।
बात-बात पर गुस्सा आना, परिवार या दोस्तों से मिलने का मन न करना और अकेले रहने की इच्छा बढ़ना भी इमोशनल ब्रेकडाउन के संकेत हो सकते हैं।
बहुत ज्यादा कैफीन से बचें: अधिक चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक कुछ लोगों में बेचैनी और नींद की समस्या बढ़ाती हैं।
शराब से दूरी रखें: शराब मनोदशा और नींद पर असर डाल सकती है तथा कुछ दवाओं के साथ नुकसानदेह हो सकती है।
खाना छोड़ने की आदत न बनाएं: नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन लेने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है।
बहुत ज्यादा मीठे और प्रोसेस्ड फूड से दूरी: इनकी जगह फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन वाला संतुलित भोजन चुनें।
अगर उदासी, निराशा या रुचि की कमी हमेशा बनी रहती है, तो इन्हें मानसिक तनाव के लक्षण मानकर चिकित्सक से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक कारणों की जांच भी कर सकते हैं।
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसे ट्रीटमेंट से इन सबसे निपटा जा सकता है। कुछ लोगों को एंटीडिप्रेसेंट दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसके साथ ही नियमित समय पर सोना-जागना, फिजिकल एक्टिविटी, बैलेंस मील और भरोसेमंद लोगों से जुड़े रहना ट्रीटमेंट में हेल्प कर सकता है।
भारत में टेली-मानस (Tele-MANAS) की 24 घंटे उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 14416 पर मुफ्त सहायता ली जा सकती है।