

Calcium Rich Foods: कैल्शियम के लिए दूध को सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन क्या रोज एक गिलास दूध पीना शरीर में कैल्शियम की जरूरत को पूरा कर सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है। जानिए डाइट में किन चीजों को शामिल करके कैल्शियम की जरूरत पूरी की जा सकती है।
कैल्शियम का नाम आते ही सबसे पहले दूध का ख्याल आता है। बचपन से ही हमें हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने के लिए दूध पीने की सलाह दी जाती है। दूध और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दही, पनीर और छाछ कैल्शियम के अच्छे स्रोत जरूर हैं, लेकिन सिर्फ दूध पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। शरीर के लिए कैल्शियम की जरूरत का पता उस व्यक्ति की उम्र और उसकी शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है। ICMR-NIN की 2020 RDA के मुताबिक 18 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों और महिलाओं को रोजाना 100 mg कैल्शियम की जरूरत होती है।
मसलन आप रोज एक गिलास दूध पीते हैं। इससे कैल्शियम जरूर मिलता है, लेकिन पूरे दिन की जरूरत केवल इसी एक चीज से पूरी नहीं हो सकती है। इसके अलावा दही, पनीर, छाछ, रागी, बाजरा, सोया, टोफू, तिल, दाल, चना और कुछ हरी सब्जियां भी आपके डाइट का हिस्सा होना चाहिए।
अगर आपकी डाइट में दूध या डेयरी उत्पाद कम है तो तिल एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 100 ग्राम तिल में calcium की मात्रा दूध और पनीर की तुलना में अधिक होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि रोज 100 ग्राम तिल खाया जाए। आप तिल को सब्जी, चटनी, सलाद, रोटी के आटे या तिल के लड्डू की तरह अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं।
शरीर के लिए कैल्शियम रिच फूड खाना ही अनिवार्य नहीं है, उसका एब्जॉर्बशन भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए विटामिन D की भूमिका अहम होती है। एक वयस्क के लिए विटामिन D 600 IU प्रतिदिन होनी चाहिए। इसके लिए बैलेंस फूड, फिजिकल एक्टिविटी और धूप बेहद जरूरी है।
अगर आप अपने शरीर में कैल्शियम की मात्रा को सही रखना चाहते हैं, तो दिनभर की डाइट को इस तरीके से बैलेंस कर सकते हैं।
सुबह: दूध या दही
नाश्ते में: रागी/बाजरा आधारित चीजें जैसे चीला
दोपहर: दाल, सब्जी और रोटी/चावल के साथ दही
शाम: तिल, चना या कुछ नट्स
रात: पनीर, टोफू या सोया के साथ सब्जियां
कैल्शियम सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं बल्कि यह मांसपेशियों के काम, नर्व सिग्नलिंग और कई दूसरे शारीरिक फंक्शन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर का अधिकांश कैल्शियम हड्डियों और दांतों में जमा होता है। कैल्शियम की कमी होने पर हड्डियां कमजोर होती हैं, जिससे आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपके शरीर में कैल्शियम बहुत ज्यादा कम है, तो मांसपेशियों में ऐंठन और कमजोरी भी हो सकती है।