
बालासन और शवासन शरीर को आराम देने में मदद करते हैं।
अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम से सांस पर ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास करें।
नियमित योग के साथ पर्याप्त नींद और बैलेंस डाइट से मेंटल हेल्थ बेहतर होता है।
Yoga For Mental Health: लगातार काम करना, जिम्मेदारियां निभाना और भविष्य की चिंता करना हमारी आदत में शुमार है, लेकिन कई बार यह मन को थका देता है। कुछ लोगों को तनाव के कारण बेचैनी महसूस होती है, तो कुछ को रात में सोने या कॉन्सनट्रेशन में परेशानी होती है। ऐसे में योग और सांस से जुड़े अभ्यास शरीर को आराम देने और फोकस बढ़ाने में मदद करते हैं।
अगर आप अपनी दिनचर्या में योग शामिल करना चाहते हैं, तो इन चार आसान अभ्यासों से शुरुआत कर सकते हैं।
कैसे करें: सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं। अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और माथे को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। दोनों हाथों को सामने फैलाकर रखें या शरीर के किनारे ले आएं। इस मुद्रा में सहजता से सांस लेते हुए 20 से 30 सेकंड तक रुकें। समय के साथ अपनी क्षमता के अनुसार समय बढ़ा सकते हैं।
फायदा: बालासन शरीर को आराम देने और कुछ समय के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ से ध्यान हटाने में मदद कर सकता है। इसमें सांस पर ध्यान केंद्रित करने से रिलैक्स महसूस होता है।
कैसे करें: पीठ के बल आराम से लेट जाएं और पैरों को थोड़ा अलग रखें। दोनों हाथों को शरीर से कुछ दूरी पर रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रहने दें। आंखें बंद करके सामान्य सांस लें। शरीर के अलग-अलग हिस्सों को धीरे-धीरे ढीला छोड़ते जाएं। शुरुआत में 3 से 5 मिनट तक अभ्यास कर सकते हैं।
फायदा: शवासन शरीर के तनाव को कम महसूस करने और मन को शांत करता है। काम के बाद या दूसरे योग आसन के अंत में इसे करने से आराम मिलता है। अगर इस दौरान नींद आ जाए, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है।
कैसे करें: आराम से बैठें और रीढ़ को सीधा रखें। दाएं अंगूठे से दाईं नासिका बंद करके बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस लें। फिर बाईं नासिका बंद करके दाईं ओर से सांस छोड़ें। इसके बाद दाईं ओर से सांस लें और बाईं ओर से छोड़ें। यह एक चक्र है। शुरुआत में 3 से 5 साइकिल बिना जोर लगाए करें।
फायदा: अनुलोम-विलोम के दौरान सांस की गति और प्रक्रिया पर ध्यान देना होता है, जिससे मन को वर्तमान पल पर फोकस करने में मदद मिलती है। धीमी और आराम से सांस लेने के अभ्यास से तनाव कम महसूस होता है। चक्कर आए या असहजता महसूस हो, तो अभ्यास रोक दें। सांस को जबरन न रोकें।
कैसे करें: किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। नाक से धीरे-धीरे सांस लें। सांस छोड़ते समय मुंह बंद रखते हुए भौंरे जैसी हल्की गुनगुनाहट पैदा करें। आवाज सहज रखें और शरीर पर जोर न डालें। शुरुआत में 3 से 5 बार इसका अभ्यास कर सकते हैं।
फायदा: भ्रामरी प्राणायाम में सांस छोड़ने और गुनगुनाहट पर ध्यान दिया जाता है। यह अभ्यास रिलैक्स महसूस करने और तनाव के समय अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। इसे शांत वातावरण में करना बेहतर रहता है।