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World Poha Day 2026: सुदामा की पोटली से लेकर इंदौर की गलियों तक, जानिए भारत के पसंदीदा नाश्ते की दिलचस्प कहानी

World Poha Day: पोहा, एक पॉपुलर ब्रेकफास्ट है, जो चपटे चावल और कुछ मसालों से बनाया जाता है और लाखों भारतीयों के खाने का हिस्सा है। हल्के खाने के तौर पर मशहूर झटपट बनने वाला एक पौष्टिक नाश्ता है पोहा।

  • Written By: रीता राय सागर
Updated On: Jun 07, 2026 | 07:27 AM

पोहा (साभार.सोशल मीडिया)

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Poha Day 2026: आमतौर पर नाश्ते में अलग-अलग तरह की चीजें खाई जाती हैं, लेकिन इन में सबसे ज्यादा फेमस पोहा को माना जाता है। वैसे तो पोहा भारत के ज्यादातर राज्य में खाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश में यह फेमस ब्रेकफास्ट डिश के रूप में जाना जाता है।

हालांकि, पोहे को देश के हर कोने में बड़े चाव से खाया जाता है, लेकिन अलग-अलग जगहों पर इसे कई नामों से जाना जाता है, इसे चिवड़ा, चपटा चावल, चिड़ा, चिउरा, चिवड़ा, अवल, अटुकुल्लू कहा जाता है। पोहा हर जगह इतना पसंद किया जाता है कि इसे अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है, लेकिन इस पोहे का भी इसके स्वाद की तरह ही एक लंबा इतिहास है। महाभारत से लेकर सिंधिया शासन काल तक पोहे की दिलचस्प कहानी (Poha History In India) है, आइए जानते हैं।

पोहा, होल्कर और सिंधिया शासन का प्रतीक

चावल, प्राचीन भारत में मुख्य भोजन था, जहां चावल को उबालकर खाने में उपयोग में लाया जाता था। इसमें चावल के दानों को सूखाने और चपटा करने से पहले हल्का पकाना शामिल है। चावल की शेल्फ लाइफ को बढ़ाने के लिए इस विधि का उपयोग किया जाने लगा। इससे पाचनशक्ति और पोषण मूल्य को बढ़ाने के लिए भी किया जाता था। समय के साथ, यह उबले हुए चावल अपने चपटे रूप में, पोहा के नाम से लोकप्रिय हो गए।

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कहते हैं कि पोहा सबसे पहले महाराष्ट्र में अस्तित्व में आया था। होल्कर और सिंधिया के शासन काल में यह व्यंजन बड़े पैमाने पर लोकप्रिय हुआ। जब शासक महाराष्ट्र से मध्य भारत आए, तो उन्होंने इंदौर पर कब्जा कर लिया और अन्य चीज़ों के अलावा पोहा और श्रीखंड भी अपने साथ लाए। इतिहास बताता है कि ये दो व्यंजन होल्कर और सिंधिया के शासनकाल से ही चले आ रहे हैं। ये दोनों व्यंजन मध्य प्रदेश के इतिहास में होल्कर और सिंधिया के आक्रमण और शासन का संकेत है।

पोहा (साभार. सोशल मीडिया)

महाभारत से चला आ रहा है पोहा

पोहे का जिक्र महाकाव्य महाभारत में भी मिलता है, जब श्रीकृष्ण के परम मित्र सुदामा उनसे मिलने पहुंचे, तो सुदामा की पत्नी ने उन्हें कृष्ण को भेंट स्वरूप कुटे हुए चावल यानी पोहे भेजे थे। इस पोहे को सुदामा छुपा रहे थे और श्रीकृष्ण इस चपटे चावल को देखते ही भाव विभोर हो उठे।

भारतीय सैनिक भी पोहा लेकर जाते थे…

एक अन्य कहानी के अनुसार, 1846 में जब भी भारतीय सैनिकों को पानी के जहाज के जरिए कहीं भेजा जाता था, तब उनके खाने में पोहा हुआ करता था। पोहा चिवड़े से तैयार किया जाता है और स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें मूंगफली, कड़ी पत्ता और राई का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कई राज्यों में पोहे को परोसने का तरीका अलग है। राजस्थान में पोहे पर तीखी भुजिया डाली जाती है और मध्य प्रदेश में पोहा के ऊपर नुक्ति-सेंव ढालकर जलेबी के साथ खाई जाती है। महाराष्ट्रियन पोहे में आलू डाला जाता है और ऊपर सेव डालकर, इसे चटनी के साथ परोसा जाता है।

पोहा (साभार.सोशल मीडिया)

जब पोहे पर लग गया था बैन

पोहे को अंग्रेज शासक सैनिकों का संपूर्ण आहार मानते थे। साथ ही इसे बनाना भी आसान था। आपको जानकर हैरानी होगी कि आजाद भारत में पोहे पर बैन भी लगाया जा चुका है।  दरअसल, 1960 में चावल की कमी होने के कारण सरकार को पोहा बनाने पर बैन लगाना पड़ा था।

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कैसे शुरु हुई इंदौर में पोहे की कहानी (Story Of Indori Poha)

इंदौर में पोहा को व्यावसायिक पहचान दिलाने का श्रेय पुरुषोत्तम जोशी जी को दिया जाता है। कहते हैं, आजादी के बाद वे रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के निजामपुर से इंदौर पहुंचे। कुछ समय नौकरी करने के बाद उन्होंने स्वयं का काम शुरू करने का निर्णय लिया। वर्ष 1948-49  में पुरुषोत्तम जोशी ने इंदौर के तिलकपथ क्षेत्र में ‘उपहार गृह’ नाम से पोहा बेचने की शुरुआत की। उस समय पोहा कुछ पैसों में मिलती थी।

इंदौरी पोहा (साभार.सोशल मीडिया)

आज रोजाना इंदौर में 90 टन पोहे की खपत होती है, जो रविवार को और अधिक बढ़ जाती है। इंदौर में रोजाना 1200 से अधिक जगहों पर पोहे बेचे जाते हैं।

पोहे की खास बात यह कि है यह बनाने में तो आसान है ही साथ ही काफी हेल्दी भी है। यह कार्बोहाइड्रेड का अच्छा स्रोत होने के अलावा आयरन और फाइबर से भी भरपूर है, इसलिए पोहा खाने के बाद काफी देर तक आपको पेट भरा हुआ महसूस होगा। पोहा खाने में काफी हल्का होता है और आसानी से पच जाता है। इसके अलावा, जो लोग ग्लूटन फ्री डाइट पर होते हैं, वो भी पोहा खा सकते हैं। इसकी गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए इसमें ढेर सारी मूंगफली और नींबू जरूर ऐड करें।

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Published On: Jun 07, 2026 | 07:10 AM

Topics:  

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