Navratri Day 7: नवरात्रि पर के सातवें दिन मां कालरात्रि को चढ़ाएं गुड़ से बना ये भोग, चमक जाएगी किस्मत!
Navratri 2026: नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है, जिन्हें शक्ति और सुरक्षा की देवी माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और गुड़ से बने खास भोग का प्रसाद चढ़ाने का विशेष म
- Written By: प्रीति शर्मा
मां कालरात्रि की पूजा करते श्रद्धालु (सौ. फ्रीपिक)
Maa Kalaratri Bhog: चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां कालरात्रि को समर्पित है। दुष्टों का विनाश करने वाली माता को गुड़ और उससे बने पकवानों का भोग अत्यंत प्रिय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज के दिन गुड़ का दान और भोग दरिद्रता को दूर कर शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन (सप्तमी) माता के सबसे भयंकर और शक्तिशाली स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना का दिन है। काल का नाश करने वाली और शुभ फल देने के कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना सबसे उत्तम माना गया है। यदि आप भी माता की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो इस सप्तमी पर बाजार की मिठाई के बजाय घर पर गुड़ से बने इन पकवानों का भोग लगा सकते हैं।
क्यों प्रिय है माता को गुड़ का भोग
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित करने से आकस्मिक आने वाले संकटों का नाश होता है। यह भोग न केवल माता को प्रसन्न करता है बल्कि साधक के जीवन में आने वाली बाधाओं और भय को भी दूर करता है। भोग लगाने के बाद इस गुड़ का कुछ हिस्सा दान करना और शेष प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
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गुड़ की लापसी
सप्तमी के दिन गुड़ की लापसी बनाना बहुत शुभ माना जाता है। इसके लिए दलिया को घी में भूनकर उसमें गुड़ का पानी और ड्राई फ्रूट्स डालकर पकाया जाता है। यह शुद्ध और सात्विक भोग माता को अति प्रिय है।
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गुड़ और आटे के गुलगुले
उत्तर भारत में सप्तमी पर गुलगुले बनाने की परंपरा है। गेहूं के आटे में गुड़ का घोल मिलाकर तैयार किए गए ये गुलगुले मां कालरात्रि को नैवेद्य के रूप में अर्पित किए जाते हैं।
गुड़ के मालपुए
यदि आप माता को विशेष प्रसन्न करना चाहते हैं तो गुड़ और सौंफ के मेल से बने मालपुए का भोग लगाएं। यह न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि माता के शुभंकरी स्वरूप को शीतलता प्रदान करते हैं।
पूजा विधि और महत्व
सप्तमी की रात को सिद्धियों की रात भी कहा जाता है। आज के दिन नीले या काले रंग के वस्त्र त्यागकर साफ सुथरे वस्त्र पहनकर माता की पूजा करनी चाहिए। माता को गुड़ का भोग अर्पित करते समय ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में गुड़ का दान जरूरतमंदों को करें इससे स्वास्थ्य संबंधी विकार दूर होते हैं और आर्थिक संपन्नता आती है।
