क्या डांट-फटकार बना रही है बच्चों को और ज्यादा जिद्दी? जानिए प्यार से उन्हें समझदार बनाने के आसान तरीके
Child Parenting Tips For Kids: डांट-फटकार कई बार बच्चों में सुधार के बजाय उनकी जिद को और बढ़ा सकती है, क्योंकि वे खुद को न समझे जाने और दबाव महसूस करने लगते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
जिद्दी बच्चों को कैसे सुधारे (सौ.सोशल मीडिया)
Understanding And Handling Stubborn Child Behavior: अक्सर ऐसा होता है कि जब बच्चे बात नहीं मानते, खाने में आनाकानी करते हैं या अपनी जिद पर अड़ जाते हैं, तो माता-पिता गुस्से में आकर उन पर चिल्लाने लगते हैं। लेकिन चाइल्ड एक्सपर्ट्स का मानना है कि बार-बार डांटना या ऊंची आवाज में बात करना बच्चों को अनुशासित बनाने के बजाय उन्हें डरा सकता है या फिर भावनात्मक रूप से आपसे दूर कर सकता है।
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा जिम्मेदार, समझदार और आत्मविश्वासी बने, तो उसे डांटने की बजाय इन आसान और असरदार तरीकों को अपनाएं।
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गलती पर गुस्सा नहीं, समझदारी से करें मार्गदर्शन
बच्चे से गलती होने पर तुरंत डांटने या चिल्लाने की बजाय उसे शांति से समझाएं कि उसने क्या गलती की है और उसे कैसे सुधारा जा सकता है।
उदाहरण के लिए, “तुम हमेशा सामान बिखेर देते हो” कहने के बजाय आप कह सकते हैं, “अगर तुम खिलौने समेट लेते, तो कमरा और भी सुंदर दिखता।”
इस तरह की बातचीत बच्चे को अपनी गलती समझने और सुधारने के लिए प्रेरित करती है।
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अच्छे काम की तारीफ करें, बढ़ेगा आत्मविश्वास
जब भी बच्चा कोई अच्छा काम करे, उसकी खुलकर सराहना करें।
जैसे आप कह सकते हैं, “मुझे बहुत अच्छा लगा कि तुमने अपनी किताबें खुद व्यवस्थित रखीं।”
ऐसी तारीफ बच्चों को सकारात्मक व्यवहार दोहराने के लिए प्रेरित करती है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।
पहले उनकी बात सुनें, तभी वो आपकी बात मानेंगे
- अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपकी बात ध्यान से सुने, तो सबसे पहले आपको उसकी बात सुनने की आदत डालनी होगी।
- जिद्दी या मजबूत व्यक्तित्व वाले बच्चों की अपनी राय होती है और वे कई बार अपनी बात पर अड़े रहते हैं।
- अगर उनकी बात सुने बिना उन्हें रोक दिया जाए, तो वे और ज्यादा जिद्दी हो सकते हैं।
इसलिए जब बच्चा अपनी बात कह रहा हो, तो उसे बीच में न टोकें। - धैर्य के साथ उसकी बात सुनें और फिर प्यार से उसे सही-गलत समझाएं।
टाइम-आउट नहीं, अपनाएं ‘टाइम-इन’ का तरीका
- बच्चे के गलत व्यवहार पर उसे अकेला छोड़ने या कमरे में भेजने की बजाय कुछ समय उसके साथ बिताएं।
- उसे अपने पास बैठाकर शांत माहौल में समझाएं कि उसका व्यवहार क्यों ठीक नहीं था और आगे उसे क्या करना चाहिए।
- इस तरीके से बच्चा खुद को अकेला महसूस नहीं करता और माता-पिता के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी मजबूत होता है।
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आदेश देने की बजाय साथ मिलकर काम करें
- जिद्दी स्वभाव वाले बच्चे अक्सर बहुत संवेदनशील होते हैं। वे इस बात को गहराई से महसूस करते हैं कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।
- इसलिए उनसे बात करते समय अपनी आवाज, शब्दों और बॉडी लैंग्वेज का खास ध्यान रखें।
- “तुम अभी ये करो” या “मैंने तुमसे कहा था” जैसे वाक्यों की जगह आप कह सकते हैं, “चलो, हम दोनों मिलकर ये काम करते हैं” या “क्या हम इसे थोड़ा मजेदार तरीके से करें?”
- जब बच्चे को लगता है कि उसकी राय की भी अहमियत है, तो वह सहयोग करने लगता है और जिद धीरे-धीरे कम होने लगती है।
- याद रखें, प्यार और धैर्य ही है सबसे बड़ा अनुशासन
- बच्चों को जिम्मेदार और अनुशासित बनाने के लिए हर बार डांटना जरूरी नहीं होता। कई बार शांत रहकर, उनकी भावनाओं को समझकर और सही दिशा दिखाकर आप उनसे कहीं बेहतर व्यवहार पा सकते हैं।
- प्यार, धैर्य और संवाद का तरीका ही बच्चों को न सिर्फ आज अच्छा बनाता है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए भी मजबूत और समझदार इंसान बनाता है।
