बदल लीजिए आंखों को दिन में कई बार मलने की आदत, आंखों की जा सकती है रोशनी
change the habit of rubbing eyes: आंखें हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील अंग हैं। इससे हम दुनिया को देखने के साथ-साथ अपनी भावनाएं तक व्यक्त कर सकते हैं। इसलिए इसकी सुरक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी है।
- Written By: गीतांजली शर्मा
आंखों को बार-बार मलने से बढ़ सकती है परेशानी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Rubbing the eyes again and again is harmful: आंखें हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग हैं। वे न सिर्फ हमें दुनिया को देखने का अवसर देती हैं, बल्कि हमारी भावनाओं को भी व्यक्त करती हैं। हालांकि, थकान, जलन या खुजली होने पर हम अक्सर बिना सोचे-समझे अपनी आंखों को मलने लगते हैं। यह आदत क्षणिक राहत तो दे सकती है, लेकिन यह हमारी आंखों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है, यहां तक कि हमारी रोशनी भी छीन सकती है।
संक्रमण का खतरा
अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के शोध के अनुसार, आंखों को बार-बार मलने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हमारे हाथ दिन भर में अनगिनत सतहों को छूते हैं, जिन पर बैक्टीरिया और कीटाणु मौजूद होते हैं। जब हम बिना हाथ धोए अपनी आंखों को छूते या मलते हैं, तो ये बैक्टीरिया सीधे आंखों में प्रवेश कर जाते हैं। इससे आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना और यहां तक कि कंजक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर यह आदत जारी रहती है, तो आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और आंखें छोटी-मोटी परेशानियों से भी प्रभावित होने लगती हैं।
कॉर्निया को नुकसान
आंखों को बार-बार मलने से उनकी सबसे बाहरी और नाजुक परत, कॉर्निया (Cornea), पर भी बुरा असर पड़ता है। जोर से रगड़ने या बार-बार मलने से कॉर्निया पर छोटे-छोटे घाव या खरोंच आ सकते हैं, जिसे मेडिकल की भाषा में ‘कॉर्नियल एब्रेशन’ (Corneal Abrasion) कहा जाता है। यह स्थिति न केवल दर्दनाक होती है, बल्कि इससे रोशनी में देखने में परेशानी, धुंधलापन और लगातार जलन भी हो सकती है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह आगे चलकर गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है, जिससे दृष्टि को स्थायी नुकसान हो सकता है।
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ग्लूकोमा और कराटोकोनस का खतरा
बार-बार आंखों को मलने की आदत से ग्लूकोमा (Glaucoma) जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। ग्लूकोमा में आंखों की ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है। आंखों को मलने से उनमें दबाव बढ़ जाता है, और अगर यह दबाव लंबे समय तक बना रहे, तो ग्लूकोमा का खतरा पैदा हो सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे दृष्टि को खत्म करती है और सही समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति हमेशा के लिए अपनी रोशनी खो सकता है।
इसके अलावा, यह आदत कराटोकोनस (Keratoconus) जैसी गंभीर बीमारी को भी जन्म दे सकती है, जिसमें कॉर्निया पतली होकर शंकु जैसी हो जाती है, जिससे व्यक्ति को हर चीज धुंधली दिखने लगती है।
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त्वचा और डार्क सर्कल्स पर प्रभाव
आंखों के आसपास की त्वचा बेहद नाजुक और पतली होती है। जब हम उन्हें बार-बार मलते हैं, तो वहां की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे डार्क सर्कल्स (Dark Circles) और गहरे हो जाते हैं। साथ ही, त्वचा की प्राकृतिक लोच खत्म हो जाती है, जिससे समय से पहले झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं। इस तरह, यह आदत न केवल आंखों की सेहत, बल्कि चेहरे की सुंदरता को भी प्रभावित कर सकती है।
यदि आपको आंखों में खुजली, जलन या थकान महसूस हो, तो उन्हें मलने के बजाय ठंडे पानी से धोएं या डॉक्टर से सलाह लें। यह एक छोटी सी आदत है जो आपकी आंखों के स्वास्थ्य और सुंदरता को बचा सकती है।
