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नाग पंचमी की पूजा इस कथा के बिना होगी अधूरी, जानिए क्या है इस कथा की महिमा
Vrat Katha: नाग पंचमी हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस व्रत से जुड़ी एक बहुत ही प्रेरणादायक और प्रचलित कथा है। जिसे पढ़ें बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी

नाग पंचमी(सौ.सोशल मीडिया)
Nag Panchami Vrat Katha: आज पूरे देशभर में नाग पंचमी का पावन त्योहार मनाया जा रहा है। यह शुभ तिथि देवों के देव महादेव और नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि सांपों की पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और बुराई व सांपों के भय का नाश होता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आपको पता हैं कि नाग पंचमी का व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है? आइए, आज हम आपको उसी पावन कथा से परिचित कराते हैं, जो नाग पंचमी के महत्व को और भी बढ़ा देती है।
ये है नाग पंचमी व्रत पौराणिक कथा
प्राचीन समय में एक राज्य में सेठ रहा करता था जिसके सात बेटे थे। सेठ के सातों बेटों की शादी हो चुकी थी। सेठ की सबसे छोटी बहू बुद्धिमान और चरित्रवान थी। एक दिन बड़ी बहू घर की सभी बहुओं को मिट्टी लाने के लिए अपने साथ ले गई। मिट्टी खोदते समय बड़ी बहू को एक सांप दिखा जिसको वो खुरपी से मारने लगी।
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तभी छोटी बहू ने उसे रोक दिया और कहा कि इस सांप का कोई पाप नहीं है। सांप के पास जा कर छोटी बहू बोली कि ‘तुम यहीं रुको हम थोड़ी देर में वापस आते हैं।’ ऐसा बोलने के बाद सभी बहुएं घर वापस आ गईं।
काम में व्यस्त होकर छोटी बहू सांप को किया वादा भूल गई, इसी बीच सांप उसका इंतजार करता रहा। दूसरे दिन जब छोटी बहू को सांप से किया वादा याद आया तब वो भागी-भागी सांप के पास गई। सांप के पास जाकर उसने उसे क्षमा मांगी और कहा की ‘भैया मैं काम में व्यस्त हो कर अपना वादा भूल गई थी।
सांप ने कहा कि ‘तुमने मुझे अपना भाई माना है इसलिए मैं तुम्हें जाने दे रहा हूं वरना कोई और होता तो मैं उसे डस लेता।’ इसके साथ, सांप ने कहा कि ‘तुमने मुझे भाई बोला है तो, आज से, मैं तुम्हारा भाई हूं, तुम्हें जो मांगना है वो मांग लो।’ तभी छोटी बहू ने कहा कि ‘मेरा कोई भाई नहीं है, आज से आप मेरे भाई हैं।’ कुछ दिन बाद, मनुष्य का रूप धारण करके सांप अपनी बहन को लेने आया। उस पर विश्वास करके घर वालों ने छोटी बहू को जाने दिया।
सांप छोटी बहू को अपने घर ले गया जहां सांप का परिवार रहता था। सांप के घर में इतना सारा धन देखकर बहू हैरान हो गई। एक दिन सांप की मां ने छोटी बहू को कहा कि ‘अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना।’ मगर छोटी बहू यह बात भूल गई और उसने सांप को गर्म को दूध पिला दिया जिसके वजह से सांप का मुंह जल गया।
सांप की मां बहुत गुस्से में थी मगर सांप ने उसे समझाया। थोड़ी देर बाद सांप ने कहा कि अब बहन का घर जाने का समय आ गया है। घर से विदा करते समय सांप के परिवार ने छोटी बहू को सोना, चांदी, हीरे, मोती, कपड़े और गहनों से भर दिया।
जब छोटी बहू घर लौटी तब उसके धन को देखकर बड़ी बहू को जलन होने लगी। गहनों के साथ सांप ने छोटी बहू को एक हीरे और मणी से बना हार दिया था। पूरे राज्य में इस हार की चर्चा होने लगी थी। जब रानी को पता चला तब उसने ये हार मंगवाया।
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छोटी बहू को ये पसंद नहीं आया और उसने सांप को बुला कर सारी बात बता दी। छोटी बहू ने भाई से आग्रह किया कि वो कुछ ऐसा करे जिससे ये हार छोटी बहू के गले में हार बन जाए और दूसरों के गले में सांप।
बहन की बात मानकर भाई ने भी ऐसा ही किया। जब रानी ने ये हार पहना तब उसके गले में हार सांप में बदल गया। रानी चीखने लगी। रानी की चीख सुनकर राजा ने छोटी बहू को लाने का आदेश दिया।
जब छोटी बहू राजा और रानी के पास आई तब उसने बताया कि यह हार उसके गले में हार और दूसरे के गले में सांप बन जाता है। तब राजा ने छोटी बहू को हार पहनने के लिए कहा। छोटी बहू के गले में जाते ही सांप हार बन गया। यह चमत्कार देखकर राजा बहुत खुश हुआ और उसे धन-दौलत देकर भेज दिया।
The worship of nag panchami will be incomplete without this story
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