Jagannath Rath Yatra: प्रभु जगन्नाथ के 3 रथों का क्या है महत्व? जानें रथों के निर्माण और उनसे जुड़े रोचक तथ्य

Jagannath Rath Yatra Facts: जगन्नाथ रथ यात्रा में इस्तेमाल की जाने वाली रथें यूं ही नहीं होते, बल्कि उनके कई आध्यात्मिक महत्व है। इस लेख में हम जानेंगे प्रभु के रथ से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में।
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जगन्नाथ रथ (फोटो.सोशल मीडिया)
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Jagannath Puri Rath Yatra 2026: ओड़िशा के पुरी में प्रत्येक वर्ष होने वाला विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था और सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जिसे सदियों से निभाया जा रहा है। इसके साथ ही यह त्योहार भारतीय शिल्पकला का प्रतीक है।

इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इस रथ को प्रत्येक वर्ष नए सिरे से तैयार किया जाता है।

क्या है रथों की विशेषता

सदियों पुरानी इस परंपरा को पारंपरिक बढ़ई परिवार द्वारा निर्मित किया जाता है। नीम की लकड़ी से तैयापर होने वाले इन रथों के निर्माण में लोहे की कील, नट या बोल्ट जैसी किसी भी धातु का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

भगवान जगन्नाथ का रथ

भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष कहलाता है। यह तीनों रथों में सबसे बड़ा होता है। इसकी ऊंचाई लगभग 45 फीट होती है और इसमें 16 पहिए लगे होते हैं। इस रथ का प्रमुख रंग लाल और पीला होता है, जो ऊर्जा, दिव्यता और शुभता का प्रतीक होता है। इसके स्पर्श मात्र से ही जीवन में खुशहाली आती है।

जगन्नाथ रथ (फोटो.सोशल मीडिया)

भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ की खासियत

भगवान बलभद्र तालध्वज रथ पर विराजमान होते हैं। लगभग 44 फीट ऊंचे इस रथ में 14 पहिए होते हैं। इसका पारंपरिक रंग लाल और हरा होता है,  वहीं माता सुभद्रा के रथ को दर्पदलन कहा जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 43 फीट होती है और इसमें 12 पहिए लगे होते हैं। इस रथ का रंग लाल और काला होता है।

रथों के पीछे छुपे आध्यात्मिक संदेश

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन रथों में लगे पहिए केवल बढ़ने या यात्रा करने के लिए नहीं होते हैं, बल्कि न रथों के पीछे छुपे होते हैं कई गूढ़ संदेश। जगन्नाथ रथ यात्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले रथों को संसार के कालचक्र से जोड़ा गया है, जो जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म के अनंत चक्र की याद दिलाते हैं।

16 पहिए चंद्रमा की 16 कलाओं का प्रतीक

भगवान जगन्नाथ के रथ के 16 पहिए मानव जीवन की 16 कलाओं और चंद्रमा की 16 कलाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। बलभद्र के रथ के 14 पहिए शास्त्रों में वर्णित ब्रह्मांड के 14 लोकों का प्रतीक माने जाते हैं, जबकि माता सुभद्रा के रथ के 12 पहिए वर्ष के 12 महीने और समय के लगातार बढ़ते जाने का प्रतीक माने जाते हैं।

जगन्नाथ रथ (फोटो.सोशल मीडिया)

रथ और मानव शरीर में क्या है समानता

रथ यात्रा का वर्णन कठोपनिषद में भी मिलता है, जहां रथ को मानव शरीर के समान माना गया है। इस दृष्टि से रथ स्वयं मानव शरीर का प्रतीक है, भगवान उसमें विराजमान आत्मा हैं, रथ को खींचने वाली रस्सी भक्ति का प्रतीक है और पहिए जीवन के अविरल रूप से चलते रहने और उसके कर्म चक्रों के बारे में बताते हैं।

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