बड़े हमले की फिराक में हैं आतंकी, IED के जरिए घाटी को दहलाने की साजिश, जम्मू कश्मीर में हाई अलर्ट
Jammu Kashmir High Alert: जम्मू-कश्मीर में IED हमले के खुफिया इनपुट के बाद हाई अलर्ट जारी। सुरक्षा बलों को बुलेटप्रूफ वाहनों के उपयोग और विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
- Written By: अर्पित शुक्ला
जम्मू-कश्मीर में मौजूद सुरक्षाबल।
Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सतर्कता बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर पूरे केंद्र शासित प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया गया है। इन सूचनाओं में संकेत मिले हैं कि आतंकी संगठन सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के जरिए बड़े हमले की साजिश कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार यह अलर्ट सभी सुरक्षा एजेंसियों और जमीनी स्तर पर तैनात बलों के साथ साझा किया गया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से पहले ही निपटा जा सके। सुरक्षा बलों को अपनी आवाजाही सीमित रखने और गैर-बुलेटप्रूफ वाहनों के इस्तेमाल से बचने के निर्देश दिए गए हैं। एहतियात के तौर पर पेट्रोलिंग और ऑपरेशनल मूवमेंट अब केवल बुलेटप्रूफ वाहनों से करने की सलाह दी गई है। साथ ही संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई
खुफिया इनपुट्स में यह आशंका भी जताई गई है कि आतंकी पुराने पैटर्न को दोहरा सकते हैं, जिसमें पहले IED ब्लास्ट और उसके बाद अंधाधुंध फायरिंग शामिल होती है। ऐसे में सुरक्षा बलों को हर स्थिति के लिए तैयार रहने और तय SOP के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल एजेंसियां पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई के लिए सतर्क हैं।
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हाइवे और दूरदराज के इलाकों पर विशेष नजर
बताया जा रहा है कि पिछले करीब दो हफ्तों से संभावित आतंकी खतरे को देखते हुए प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था का लगातार आकलन किया जा रहा है। कुछ संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर “देखो और मारो” अभियान भी चलाए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के जवान अलग-अलग या संयुक्त रूप से इन इलाकों में आतंकवाद-रोधी अभियान चला रहे हैं। हाइवे और दूरदराज के रास्तों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन और खोजी कुत्तों को भी इन अभियानों में शामिल किया गया है।
IED ब्लास्ट कितना खतरनाक होता है?
आतंकी संगठन या नक्सली IED का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने के लिए करते हैं। इनमें अत्यधिक विस्फोटक और तेजी से आग पकड़ने वाले पदार्थों का उपयोग होता है, जिससे विस्फोट के तुरंत बाद आग लग जाती है।
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IED को अक्सर सड़कों के किनारे या रास्तों में छिपाकर रखा जाता है और जैसे ही कोई व्यक्ति या वाहन इसके संपर्क में आता है, यह फट सकता है। इसके अलावा रिमोट कंट्रोल, इंफ्रारेड ट्रिप वायर जैसे तरीकों से भी इन्हें सक्रिय किया जा सकता है। विस्फोट के बाद तेज आग और घना धुआं निकलता है, जो नुकसान को और बढ़ा देता है।
