फारूख अब्दुल्ला (सोर्स- सोशल मीडिया)
Farooq Abdullah: बीते कल जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारुख अब्दुल्ला पर बीते कल हमला हुआ तो आज उनके ही खिलाफ एक गैर जमानती वारंट जारी हो गया है। जिसके बाद माना जा रहा है कि फारूख अब्दुल्ला की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला मुश्किल में पड़ते दिख रहे हैं। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) स्कैम केस में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। गुरुवार को श्रीनगर की एक कोर्ट ने CBI द्वारा जांच किए जा रहे कथित JKCA स्कैम केस में अब्दुल्ला को झटका दिया।
फारूक 2001 से 2011 के बीच जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट थे। यह कथित स्कैम 2012 में तब सामने आया जब JKCA के ट्रेजरर मंजूर वजीर ने उस समय के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सलीम खान और पूर्व ट्रेजरर अहसान मिर्जा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अब इस केस की आगे की कार्रवाई के लिए 30 मार्च को फिर से सुनवाई होगी।
फारूख अब्दुल्ला सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए और खबर है कि वे जम्मू में थे। उनके वकील ने पर्सनल पेशी से छूट के लिए एक अर्जी दी, जिसमें उन्होंने कार्यवाही में शामिल होने में उनकी असमर्थता का हवाला दिया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष को वर्चुअल मोड के जरिए अब्दुल्ला की मौजूदगी सुनिश्चित करने का ऑप्शन दिया था, लेकिन उन्होंने इस सुझाव को मना कर दिया।
अब्दुल्ला के खिलाफ JKCA के कामकाज में कथित फाइनेंशियल गड़बड़ियों से जुड़े मामले में वारंट जारी किया गया है। 2018 में CBI ने एक चार्जशीट फाइल की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि जम्मू और कश्मीर में क्रिकेट के डेवलपमेंट के लिए दिए गए 43 करोड़ रुपये से ज्यादा के पैसे का एसोसिएशन के अधिकारियों ने 2002 और 2011 के बीच गलत इस्तेमाल किया।
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यह फंड भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा इस इलाके में क्रिकेट के डेवलपमेंट के लिए दिए गए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के ग्रांट का हिस्सा थे। जांच के मुताबिक, ये फंड कथित तौर पर JKCA अकाउंट से फ्रॉड तरीके से और ट्रांजैक्शन के जरिए निकाले गए थे। चार्जशीट में अब्दुल्ला और एसोसिएशन के कई पुराने अधिकारियों के नाम थे।
जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट ने 2015 में इस केस की जांच CBI को सौंप दी थी। अब्दुल्ला ने पहले किसी भी गलत काम से इनकार किया है और आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। केस अभी भी अंडर ट्रायल है। यह देखना ज़रूरी होगा कि आगे क्या होता है।