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₹16800000000000 केवल महिलाओं की ‘रेवड़ी’ पर खर्च, कर्जे में जा रहे राज्य, PRS रिपोर्ट से मचा हड़कंप
Women Cash Transfer Scheme: देश के 12 राज्यों ने महिलाओं को हर महीने सीधे पैसे देने की स्कीमें शुरू की हैं। तीन साल पहले सिर्फ दो राज्य ऐसा करते थे। अब इन योजनाओं पर 1.68 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- Written By: अर्पित शुक्ला

सांकेतिक तस्वीर
Ladli Behna Yojana: देश के कई राज्यों में अब सरकारें महिलाओं को हर महीने सीधे पैसे दे रही हैं। तीन साल पहले तक सिर्फ दो राज्य ऐसा कर रहे थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है। साल 2025-26 में इन योजनाओं पर कुल खर्च करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी PRS Legislative Research नाम की संस्था की रिपोर्ट में दी गई है।
आधे राज्यों का बजट घाटे में
रिपोर्ट के अनुसार, जिन 12 राज्यों ने महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने की योजना शुरू की है, उनमें से 6 राज्यों को इस साल राजस्व घाटे (Revenue Deficit) का सामना करना पड़ेगा। यानी इन राज्यों की आय से ज्यादा खर्च हो रहा है। अगर इन कैश ट्रांसफर योजनाओं का खर्च हटाकर देखा जाए, तो कई राज्यों की वित्तीय स्थिति बेहतर दिखाई देती है। साफ है कि महिलाओं के लिए बढ़ते खर्च से राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
किन योजनाओं से मिल रहा है फायदा
पिछले कुछ सालों में महिलाओं को सीधी आर्थिक मदद देने वाली योजनाएं राज्यों की सबसे लोकप्रिय वेलफेयर स्कीमें बन चुकी हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य है, गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं को हर महीने सीधा पैसा देना, ताकि वे अपनी जरूरतें खुद पूरी कर सकें।
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तमिलनाडु में कलाईग्नर मगलिर उरिमाई ठोगई तित्तम, मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना और कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना जैसी स्कीमें चल रही हैं। इन योजनाओं के तहत महिलाओं को हर महीने 1000 से 1500 रुपये तक की राशि दी जाती है। वहीं, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने इस साल अपने बजट में महिलाओं की मदद के लिए खर्च बढ़ाया है। असम ने 31% और पश्चिम बंगाल ने 15% की वृद्धि की है।
अगर खर्च हटाएं तो आंकड़े सुधर जाते हैं
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इन योजनाओं का खर्च हटा दिया जाए, तो कई राज्यों की वित्तीय हालत काफी बेहतर दिखती है। उदाहरण के लिए, कर्नाटक का राजस्व घाटा 0.6% से घटकर 0.3% सरप्लस में बदल जाएगा, जबकि मध्य प्रदेश का सरप्लस 0.4% से बढ़कर 1.1% तक पहुंच सकता है। यानी महिलाओं को दी जा रही सीधी सहायता से राज्यों की वित्तीय सेहत पर बड़ा असर पड़ रहा है।
RBI की चेतावनी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पहले ही चेतावनी दे चुका है कि महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए बढ़ती सरकारी सहायता अगर ऐसे ही जारी रही, तो राज्यों के पास उत्पादक कामों में निवेश करने के लिए कम संसाधन बचेंगे। सीधी आर्थिक मदद भले ही जनता को राहत देती हो, लेकिन इसका असर लंबे समय में राज्यों की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक हो सकता है।
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कुछ राज्यों ने रकम घटाई, कुछ ने बढ़ाई
कई राज्य अब अपनी योजनाओं में बदलाव कर रहे हैं ताकि बजट पर अधिक बोझ न पड़े। महाराष्ट्र ने अप्रैल 2025 में मुख्यमंत्री लाडकी बहन योजना के तहत मिलने वाली राशि घटा दी। वहीं, झारखंड ने मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना में बढ़ोतरी करते हुए हर महीने 2500 रुपये देने का ऐलान किया।
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