आर्थर रोड जेल का बैरक नंबर 12 होगा मेहुल चौकसी का नया ठिकाना! भारत ने बेल्जियम कोर्ट को भेजा प्लान
Mehul Choksi: PNB के 12000 करोड़ रुपये के घोटाले में फरार हीरा कारोबारी मेहुल चौकसी को भारत लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। 66 साल के चौकसी को अप्रैल में बेल्जियम के एंटवर्प में गिरफ्तार किया गया था।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
मेहुल चौकसी, फोटो- सोशल मीडिया
Mehul Choksi Extradition: भारत सरकार ने बेल्जियम से उसके प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग करते हुए चौकसी को भारतीय हिरासत में मानवाधिकार मानकों के अनुसार सुविधाएं देने का विस्तृत आश्वासन दिया है।
66 वर्षीय मेहुल चौकसी को अप्रैल 2025 में बेल्जियम के एंटवर्प से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से भारत लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश में जुटा है। चौकसी के वकील दावा कर चुके हैं कि उनकी तबीयत काफी खराब है और चौकसी को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हैं, इसलिए चौकसी को जेल में रखना चौकसी के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
भारत की ओर से दिया गया प्रत्यर्पण प्रस्ताव
भारत सरकार ने चौकसी को मुंबई के आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 में रखने की योजना बनाई है। गृह मंत्रालय की ओर से बेल्जियम कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेजों में बताया गया है कि चौकसी को जो सुविधाएं मिलेंगी, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी। इन सुविधाओं में शामिल हैं:
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- मोटा कॉटन गद्दा, तकिया, चादर और कंबल
- जरूरत पड़ने पर लकड़ी या धातु का विशेष बिस्तर
- नियमित रूप से तीन बार भोजन, और मेडिकल सलाह के अनुसार विशेष डाइट
- जेल कैंटीन में फल, स्नैक्स की उपलब्धता
- रोजाना खुले में व्यायाम करने की अनुमति
- इनडोर खेल, योग, ध्यान और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं
मेडिकल सुविधाओं का पूरा इंतजाम
चौकसी की खराब तबीयत को ध्यान में रखते हुए आर्थर रोड जेल में मेडिकल सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। जेल परिसर में:
- छह मेडिकल अधिकारी
- नर्सिंग स्टाफ
- फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन
- 20 बेड वाला अस्पताल
- जरूरत पड़ने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल से विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया और मानवाधिकार
यह पूरा विवरण बेल्जियम कोर्ट को इसलिए दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत में चौकसी की हिरासत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत होगी। प्रत्यर्पण मामलों में यह एक आम प्रक्रिया है, खासकर तब जब किसी आरोपी की सेहत या जेल की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।
हाल ही में ब्रिटिश अधिकारियों ने भी दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल का निरीक्षण किया था ताकि वे प्रत्यर्पण से पहले भारत की जेलों की स्थिति की समीक्षा कर सकें। यह जरूरी होता है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन और यूरोप की अदालतें भारत की जेलों की स्थिति को लेकर चिंताएं जताती रही हैं, और इसी आधार पर कुछ प्रत्यर्पण याचिकाएं खारिज भी हुई हैं।
मामला क्यों है अहम?
मेहुल चौकसी नीरव मोदी का मामा और इस पूरे घोटाले का अहम आरोपी है। वह 2018 में देश से फरार हो गया था और तब से भारत के कई प्रयासों के बावजूद वापसी से बचता रहा है। पहले वह एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता ले चुका था और डोमिनिका में भी उसे पकड़ा गया, लेकिन अब बेल्जियम में गिरफ्तारी के बाद भारत को उम्मीद है कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया सफल हो सकती है।
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अब सबकी नजरें बेल्जियम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि वह भारत के इन आश्वासनों को कितना भरोसेमंद मानता है और चौकसी को प्रत्यर्पित करने का निर्णय लेता है या नहीं।
